
Delivery Boy Last Order: रात के बारह बज रहे थे और राहुल अपने डिलीवरी बैग को कंधे से उतारकर लगभग फेंक ही रहा था कि उसके फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर ‘नया ऑर्डर’ चमक रहा था। आज का दिन थका देने वाला था, और वह बस घर जाकर आराम करना चाहता था। लेकिन, कमीशन की भूख और किराए की चिंता ने उसे एक बार फिर ‘स्वीकार’ बटन दबाने पर मजबूर कर दिया। ऑर्डर देवगाँव से था, शहर से लगभग पंद्रह किलोमीटर दूर, और वह भी एक ऐसे पते पर जिसे उसने पहले कभी नहीं देखा था – “पुराना बाज़ार, भूतनाथ मंदिर के पास, ढलान वाली गली, तीसरा घर।” यह उसके दिन की डिलीवरी बॉय की आख़िरी ऑर्डर थी।
राहुल ने अपनी पुरानी मोटरसाइकिल स्टार्ट की, जो हल्की सी खाँसकर चालू हुई। रात का सन्नाटा ऐसा था कि उसकी मोटरसाइकिल की आवाज़ भी अजीब सी गूँज रही थी। शहर की सीमा पार करते ही सड़कें सुनसान हो गईं, केवल जंगल और खेतों का पसरा हुआ अंधेरा था। ठंडी हवा उसके चेहरे से टकरा रही थी, और कभी-कभी पेड़ों के बीच से आती सियारों की आवाज़ें दिल में एक अजीब सी दहशत पैदा कर रही थीं। राहुल ने खुद को दिलासा दिया, “यह सिर्फ़ एक और ऑर्डर है, जल्दी से देकर वापस आ जाऊँगा।” लेकिन, उसके मन में कहीं न कहीं एक अनजानी आशंका घर कर गई थी। जैसे-जैसे वह देवगाँव की ओर बढ़ रहा था, मोबाइल नेटवर्क भी कमज़ोर होता जा रहा था।
देवगाँव पहुँचते-पहुँचते चारों तरफ़ घना अँधेरा छा चुका था। चाँद बादलों के पीछे छिपा हुआ था, और सड़कों पर स्ट्रीट लाइट का नामोनिशान नहीं था। राहुल ने अपने मोबाइल की टॉर्च जलाई और पते के अनुसार गलियों में मुड़ता चला गया। भूतनाथ मंदिर तो उसे दिख गया, लेकिन ढलान वाली गली इतनी संकरी और उबड़-खाबड़ थी कि उसे मोटरसाइकिल से उतरकर पैदल ही चलना पड़ा। टॉर्च की रोशनी में टूटे-फूटे घर और जंगली झाड़ियाँ दिखाई दे रही थीं। उसने गिनना शुरू किया – “पहला घर, दूसरा घर…” और फिर उसकी नज़र एक ऐसे घर पर पड़ी, जो बाकी सबसे अलग और कहीं ज़्यादा जर्जर लग रहा था। यह वही तीसरा घर था।
घर की हालत देखकर राहुल की रूह काँप उठी। लकड़ी का दरवाज़ा आधा टूटा हुआ था और उसमें से काई की दुर्गंध आ रही थी। खिड़कियों के शीशे कब के टूट चुके थे और अंदर घना अँधेरा पसरा था। ऐसा लग रहा था मानो यह घर दशकों से वीरान पड़ा हो। “यहाँ कोई कैसे रह सकता है?” राहुल ने मन ही मन सोचा। उसने ऑर्डर की पुष्टि के लिए ग्राहक को फ़ोन लगाने की कोशिश की, लेकिन सिग्नल बिल्कुल भी नहीं आ रहा था। उसके पास ऑर्डर देने के सिवा कोई चारा नहीं था। उसने हिम्मत बटोरी और दरवाज़े पर धीरे से खटखटाया। खटखटाने की आवाज़ इतनी अजीब थी कि उसे लगा जैसे वह किसी खाली ताबूत पर दस्तक दे रहा हो।
कुछ पल तक कोई जवाब नहीं आया। राहुल ने सोचा कि शायद ग्राहक सो गया है या उसने ग़लत पता नोट कर लिया है। वह वापस मुड़ने ही वाला था कि घर के अंदर से एक धीमी, सरसराहट की आवाज़ आई। जैसे कोई बहुत पुरानी चीज़ खिसक रही हो। आवाज़ सुनकर राहुल का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसने एक बार फिर हल्की सी दस्तक दी। इस बार, दरवाज़े का टूटा हुआ हिस्सा थोड़ा और खुल गया, और अंदर से एक हल्की, बासी हवा का झोंका आया, जिससे राहुल को लगा जैसे किसी की साँसें उसके पास से गुज़री हों। उसे लगा कि वह किसी Horror Suspense Story में फँस गया है, और इसका अंत शायद अच्छा नहीं होगा।
दरवाज़े से थोड़ा और अंदर झाँकने पर राहुल को एक हल्की सी पीली रोशनी दिखाई दी, जैसे कोई पुरानी लालटेन जल रही हो। रोशनी एक छोटे से कमरे से आ रही थी। हिम्मत करके वह दरवाज़े से अंदर घुसा। अंदर भयानक सन्नाटा था, और धूल की मोटी परत हर चीज़ पर जमी हुई थी। कमरे में कोई नहीं था, लेकिन कोने में एक पुरानी लकड़ी की मेज़ पर एक मोमबत्ती जल रही थी, जिसकी लौ हवा के बिना भी फड़फड़ा रही थी। राहुल ने सोचा कि शायद ग्राहक अभी आया नहीं है, या वह बाथरूम में होगा। उसने धीमी आवाज़ में कहा, “कोई है? डिलीवरी है।”
कोई जवाब नहीं आया। राहुल ने कमरे का मुआयना किया। पुरानी, फटी हुई तस्वीरें दीवारों पर लटकी थीं, जिनमें से ज़्यादातर के चेहरे धुंधले हो चुके थे। तभी उसकी नज़र एक पुरानी, रंग उड़ी हुई तस्वीर पर पड़ी। यह एक परिवार की तस्वीर थी – पति, पत्नी और एक छोटी बच्ची। लेकिन, तस्वीर में एक अजीब चीज़ थी। बच्ची के ठीक पीछे, धुंधलके में, एक धुंधली सी आकृति दिखाई दे रही थी, जैसे कोई The Third Person in the Photo हो। उसका चेहरा स्पष्ट नहीं था, लेकिन उसकी मौजूदगी बेहद डरावनी लग रही थी, जैसे कोई अदृश्य दर्शक उस परिवार को घूर रहा हो। राहुल को लगा जैसे उसकी साँसें अटक गई हों।
वह अभी उस तस्वीर को घूर ही रहा था कि उसके ठीक पीछे से एक ठंडी, काँपती हुई आवाज़ आई, “आ गए… इतनी देर कर दी?” Aawaz Pichhe se Aayi सुनकर राहुल की रीढ़ में सिहरन दौड़ गई। उसका शरीर सुन्न पड़ गया। वह धीरे से पलटा, डर के मारे उसकी आँखें फ़ैल गईं। उसके पीछे एक बूढ़ी औरत खड़ी थी, जिसके बाल बिखरे हुए थे, आँखें धँसी हुई और शरीर पर एक पुरानी, मैली साड़ी। उसके चेहरे पर झुर्रियों का जाल था, और उसकी मुस्कान इतनी डरावनी थी कि राहुल को लगा जैसे उसने कोई भयावह सपना देख लिया हो। वह बूढ़ी औरत बिल्कुल वही दिख रही थी, जैसी उसने अपनी दादी से सुनी कहानियों में भूत प्रेत की परिकल्पना की थी।
बूढ़ी औरत ने हाथ फैलाया, उसकी उंगलियाँ लंबी और सूखी थीं, नाखूनों पर मिट्टी जमी हुई थी। “मेरा ऑर्डर ले आए?” उसने पूछा। राहुल ने काँपते हाथों से डिलीवरी बैग उसकी ओर बढ़ाया। बैग में गरमागरम खाना था, लेकिन उस घर के माहौल में वह खाना भी किसी ज़हर जैसा लग रहा था। बूढ़ी औरत ने बैग से खाने का पैकेट निकाला, और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। वह बिना कुछ कहे, धीमी गति से कमरे के दूसरे कोने में पड़ी एक पुरानी कुर्सी की ओर बढ़ने लगी। राहुल की आँखें उसकी हर हरकत पर टिकी थीं।
बूढ़ी औरत धीरे-धीरे उस कुर्सी पर जाकर बैठ गई। अँधेरे के कारण उसका चेहरा और भी डरावना लग रहा था। राहुल ने देखा कि वह कुर्सी बहुत पुरानी थी, और उस पर धूल की मोटी परत थी, लेकिन बूढ़ी औरत ऐसे बैठी थी जैसे वह रोज़ाना उसी पर बैठती हो। उसने खाना खोला, लेकिन खाया नहीं, बस उसे देखती रही। तभी राहुल की नज़र बूढ़ी औरत के पैरों पर पड़ी। उसके पैर ज़मीन से ऊपर उठे हुए थे, और वह कुर्सी पर नहीं, बल्कि हवा में तैर रही थी। यह देखकर राहुल का पसीना छूट गया। उसकी आँखें फ़ैल गईं। वह बूढ़ी औरत नहीं थी, बल्कि एक अदृश्य शक्ति थी, जो उस Kursi Par Baitha Saya बनकर बैठी थी। यह कोई सामान्य बूढ़ी औरत नहीं थी।
राहुल को अचानक याद आया कि देवगाँव के बारे में कुछ कहानियाँ प्रचलित हैं। उसकी दादी ने एक बार बताया था कि इस गाँव में एक बहुत पुरानी ज़मींदार हवेली थी, जहाँ कुछ सदियों पहले किसी ने भयानक टोना-टोटका किया था। कहा जाता है कि वहाँ रहने वाले पूरे परिवार को Black Magic Horror Story का शिकार होना पड़ा था, और उनकी आत्माएँ आज भी उस हवेली में भटकती हैं। इस घर की बनावट और माहौल उस कहानी से मेल खा रहा था। राहुल को अपनी ज़िंदगी में पहली बार लगा कि उसने हकीकत में कुछ ऐसा देख लिया है, जिसे लोग सिर्फ़ किस्से कहानियों में सुनते हैं।
राहुल का शरीर जम चुका था। वह हिलने तक की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। बूढ़ी औरत ने धीरे से अपना सर ऊपर उठाया और उसकी ओर देखा। उसकी आँखों में कोई चमक नहीं थी, बस एक भयानक शून्यता थी। उसकी आवाज़ फिर से गूँजी, “पैसा… नहीं चाहिए क्या?” राहुल को लगा जैसे कोई अदृश्य हाथ उसके गले पर कस रहा हो। वह समझ गया था कि यह कोई सामान्य इंसान नहीं है। उसे बस यहाँ से भागना था, किसी भी कीमत पर। यह सिर्फ़ एक डिलीवरी नहीं थी, यह उसकी जान पर बनी थी। यह एक सच्ची Horror Story Hindi थी, जिसका नायक वह खुद था।
राहुल ने हिम्मत करके पीछे हटना शुरू किया। हर कदम पर उसे लग रहा था जैसे कोई उसकी टाँगें खींच रहा हो। बूढ़ी औरत की आँखें अभी भी उस पर टिकी थीं। उसके मुँह से कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चुनौती थी। राहुल को लगा जैसे वह बूढ़ी औरत उसे अपने जाल में फँसा रही है। उसने सुना था कि बुरी आत्माएँ लोगों को अपने दायरे में खींचने की कोशिश करती हैं। वह जानता था कि उसे अब एक पल भी यहाँ नहीं रुकना चाहिए।
जैसे ही राहुल दरवाज़े से बाहर निकला, उसने अपनी मोटरसाइकिल की ओर भागना शुरू किया। लेकिन, अँधेरे में उसे एक और बात याद आई। देवगाँव के बारे में सिर्फ़ काली शक्तियों की ही नहीं, बल्कि एक डरावनी Devgaon ki Bhootiya Kahani भी प्रचलित थी। कहा जाता था कि गाँव के बाहरी इलाके में एक ऐसी आत्मा भटकती है, जो देर रात अकेले चलने वालों को अपने जाल में फँसा लेती है। राहुल को अब हर आवाज़, हर परछाई भयानक लग रही थी। उसे लग रहा था जैसे वह बूढ़ी औरत उसके पीछे आ रही हो, उसकी हर साँस की आहट उसके कानो में गूँज रही थी।
मोटरसाइकिल पर बैठकर राहुल ने तुरंत स्टार्ट किया। इंजन काँपते हुए चालू हुआ। उसने बिना पीछे मुड़े तेज़ी से रेस दी। वह बस इस डरावनी जगह से दूर भागना चाहता था। अँधेरे रास्तों पर वह बस भागा जा रहा था, उसे लग रहा था कि बूढ़ी औरत की हँसी उसके कानो में गूँज रही है। तभी उसे एक और आवाज़ सुनाई दी, बहुत धीमी, लेकिन इतनी तीखी कि उसकी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई। “नहीं बचा पाएगा खुद को…” यह आवाज़ बिल्कुल वैसी ही थी, जैसी दादी की कहानियों में Chudail Story in Hindi में चुड़ैलों की हँसी का वर्णन किया जाता था।
राहुल को अपनी ज़िंदगी का हर पल अब उस डरावनी रात से पहले का एक सपना लग रहा था। वह कभी भी भूतों-प्रेतों पर विश्वास नहीं करता था, लेकिन आज की रात ने उसका यह विश्वास हमेशा के लिए तोड़ दिया था। अब उसे लगता था कि कहानियों में वर्णित The Canterville Ghost जैसी कहानियाँ सिर्फ़ काल्पनिक नहीं होतीं, बल्कि उनका आधार कहीं न कहीं हकीकत से जुड़ा होता है। उसने हमेशा से ऐसी कहानियों को हँसी में उड़ाया था, लेकिन अब वह खुद एक ऐसी ही कहानी का हिस्सा बन चुका था।
भागते हुए राहुल के दिमाग में अनगिनत विचार घूम रहे थे। उसे अब लग रहा था कि यह सिर्फ़ एक बूढ़ी औरत नहीं थी, बल्कि कोई भयानक आत्मा थी जिसने उसे अपनी ओर खींचा था। उसे याद आया कि कैसे मनोवैज्ञानिक हॉरर कहानियों में मानसिक उत्पीड़न को दिखाया जाता है, जैसे हेनरी जेम्स की The Turn of the Screw में बच्चों की गवर्नेंस को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया था। राहुल को भी अब ऐसा ही लग रहा था, जैसे उसकी आँखों के सामने जो कुछ हुआ वह सच था या सिर्फ़ उसके दिमाग का फ़रेब। लेकिन, शरीर पर छा रहे ठंडे पसीने और दिल की तेज़ी से धड़कन उसे बता रही थी कि यह सब सच था।
शहर में वापस आकर राहुल ने अपनी मोटरसाइकिल रोकी। उसका शरीर काँप रहा था। उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि वह बचकर आ गया है। इस अनुभव ने उसकी ज़िंदगी बदल दी थी। वह अब कभी भी देर रात डिलीवरी पर नहीं गया। उसने अपनी नौकरी छोड़ दी और एक नए शहर में जाकर रहने लगा। वह अपनी इस भयानक रात के बारे में किसी को नहीं बता पाया, क्योंकि उसे डर था कि कोई उस पर विश्वास नहीं करेगा। यह उसके जीवन की A Classic Horror Story बन गई थी, जिसे वह कभी भुला नहीं पाया।
कई सालों बाद भी, राहुल जब भी कोई डिलीवरी बॉय देखता है, तो उसे उस रात की याद आ जाती है। उसे लगता है कि वह सिर्फ़ एक ग्राहक नहीं था, बल्कि कोई ऐसा था जिसने उसे एक संदेश दिया था – एक चेतावनी। वह कहानी किसी को नहीं बताता, लेकिन हर रात नींद में उसे वह बूढ़ी औरत दिखाई देती है, जो कुर्सी पर बैठी उसकी ओर घूर रही होती है। यह उसके लिए एक Real Horror Story in Hindi थी, जिसका अंत कभी नहीं हुआ, बस उसके ज़हन में हमेशा के लिए कैद हो गया।
राहुल को आज भी याद है कि उस रात उसने अपनी आँखों से एक भयानक आकृति को देखा था। एक ऐसी आत्मा जो लोगों को अपने जाल में फँसाती है। उसे यह भी याद है कि उसकी दादी ने एक बार ऐसी ही एक भयानक Chudail Ki Kahani सुनाई थी, जिसमें एक चुड़ैल आधी रात को लोगों को अपने घर बुलाकर उन्हें खा जाती थी। राहुल को लगा कि वह उसी चुड़ैल के चंगुल से बाल-बाल बचा है। यह अनुभव इतना गहरा था कि उसने हमेशा के लिए अपनी रात की नींदें हराम कर दी थीं।
आज भी, जब भी राहुल अपने दोस्तों को कहानियाँ सुनाता है, तो वह बस इतना ही कहता है कि कभी-कभी कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं, जिन पर विश्वास न करना ही बेहतर होता है। वह उन पुरानी भूति कहानी को अब सच मानने लगा था। वह जानता था कि उस रात उसने कोई सामान्य बूढ़ी औरत नहीं देखी थी, बल्कि एक ऐसी भयानक आत्मा देखी थी, जिसके बारे में लोग सिर्फ़ Bhoot ki Kahani में सुना करते थे। और वह जानता था कि वह आत्मा आज भी उस पुराने घर में बैठी, किसी और ‘आख़िरी ऑर्डर’ का इंतज़ार कर रही होगी।
FAQs
Ques: राहुल ने डिलीवरी बॉय की नौकरी क्यों छोड़ी?
Ans: राहुल ने देवगाँव के भूतिया घर में मिले भयानक अनुभव के बाद डिलीवरी बॉय की नौकरी छोड़ दी। उस घटना ने उसे इतना डरा दिया था कि वह देर रात काम करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था और उसे लगा कि उसकी जान को खतरा है।
Ques: देवगाँव की क्या खासियत थी जो उसे डरावना बनाती थी?
Ans: देवगाँव शहर से दूर, सुनसान और घने अँधेरे वाले रास्तों से घिरा था। वहाँ मोबाइल नेटवर्क की समस्या थी और पुराने, जर्जर घरों के कारण एक रहस्यमयी और भयावह माहौल था। गाँव के बारे में काली शक्तियों और भटकती आत्माओं की कहानियाँ भी प्रचलित थीं।
Ques: बूढ़ी औरत वास्तव में कौन थी?
Ans: कहानी के अनुसार, बूढ़ी औरत एक सामान्य इंसान नहीं थी। वह एक अदृश्य आत्मा या चुड़ैल थी, जिसकी पहचान राहुल ने उसके हवा में तैरते पैरों और डरावनी आवाज़ से की। वह पुरानी कहानियों में वर्णित काली शक्तियों से जुड़ी हुई थी।
Ques: “द थर्ड पर्सन इन द फोटो” का क्या महत्व था?
Ans: तस्वीर में तीसरी धुंधली आकृति की मौजूदगी ने राहुल को यह अहसास कराया कि उस घर में कुछ अलौकिक शक्ति मौजूद है। यह उस घर और उसमें रहने वाले परिवार के रहस्य को गहरा करती है और कहानी में सस्पेंस बढ़ाती है।
Ques: क्या यह कहानी किसी सच्ची घटना पर आधारित है?
Ans: यह कहानी कल्पना पर आधारित है, जिसे हॉरर और सस्पेंस तत्वों को मिलाकर बनाया गया है। इसमें प्रचलित लोककथाओं और हॉरर ट्रॉप्स का उपयोग किया गया है ताकि एक डरावना अनुभव दिया जा सके।
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