
यह कहानी है रामपुर गाँव की, एक ऐसी जगह जो बाहर से जितनी शांत और खूबसूरत दिखती थी, उसके सीने में उतने ही गहरे और डरावने राज दफन थे। गाँव के बड़े-बुजुर्ग अक्सर एक कहानी सुनाते थे, एक ऐसी चुड़ैल की कहानी जो सिर्फ किस्सों में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में खौफ बनकर जिंदा थी। यह कहानी थी गाँव के बाहर वाले पुराने पीपल के पेड़ पर रहने वाली चुड़ैल की।
रमेश, शहर में पला-बढ़ा एक बीस साल का नौजवान था। उसके लिए भूत-प्रेत और चुड़ैल की कहानियाँ सिर्फ मनोरंजन का साधन थीं, जिन पर वह हँसकर टाल देता था। गर्मियों की छुट्टियों में वह अपनी दादी के पास रामपुर आया हुआ था। उसकी दादी उसे अक्सर रात में बाहर जाने से रोकती और उस पीपल के पेड़ की तरफ इशारा करके कहती, “बेटा, सूरज ढलने के बाद उस तरफ कभी मत जाना। वहाँ ‘वो’ रहती है।”
रमेश अपनी दादी की बातों को अंधविश्वास मानकर मुस्कुरा देता। वह कहता, “दादी, आप भी न! ये सब पुरानी बातें हैं। आज के जमाने में कौन इन भूत प्रेत की कहानियों पर यकीन करता है।”
गाँव में रमेश का एक पुराना दोस्त था, सुरेश। एक शाम दोनों गाँव के तालाब के किनारे बैठे थे। बातों-बातों में सुरेश ने उस पीपल के पेड़ का जिक्र छेड़ दिया। उसका चेहरा गंभीर था। उसने कहा, “रमेश, तू शहर का है, तुझे ये सब मजाक लगता होगा, लेकिन यह गाँव की चुड़ैल की कहानी नहीं, हकीकत है। मेरे दादाजी बताते थे कि कई साल पहले, एक औरत को उसके ससुराल वालों ने मारकर उसी पेड़ से लटका दिया था। कहते हैं, उसकी आत्मा आज भी इंसाफ के लिए भटकती है।”
सुरेश ने आगे बताया, “वह अकेल सफर कर रहे मर्दों को अपना निशाना बनाती है। पहले तो वह एक खूबसूरत औरत के रूप में दिखती है और मदद मांगती है, लेकिन जैसे ही कोई उसके पास जाता है, वह अपना असली रूप दिखाती है। उसके पैर उल्टे हैं, और उसकी हँसी सुनकर इंसान का खून जम जाता है।”
रमेश ने एक ठंडी साँस ली, लेकिन उसके चेहरे पर अब भी अविश्वास की लकीरें थीं। उसने मजाक में कहा, “तो फिर मुझे तो एक बार ज़रूर मिलना चाहिए उस ‘पीपल वाली चुड़ैल’ से।” सुरेश ने उसे गुस्से से घूरा और कहा, “मजाक मत कर, रमेश। जान से हाथ धो बैठेगा।”
कुछ दिन बीत गए। एक रात, रमेश के शहर से एक दोस्त, विकास का फोन आया। विकास की बस खराब हो गई थी और वह पास के कस्बे में फंसा हुआ था, जो रामपुर से लगभग सात किलोमीटर दूर था। रात के ग्यारह बज चुके थे और गाँव में कोई साधन नहीं था। विकास ने रमेश से मदद मांगी।
रमेश ने अपनी बाइक की चाबी उठाई। दादी ने उसे रोकने की बहुत कोशिश की। “बेटा, इतनी रात को मत जा। और तुझे उस पीपल के पेड़ वाले रास्ते से ही जाना होगा। सुबह तक रुक जा।”
“दादी, मेरा दोस्त फंसा हुआ है। मैं उसे ऐसे नहीं छोड़ सकता। आप चिंता मत करो, मैं बस आधे घंटे में वापस आ जाऊँगा,” यह कहकर रमेश निकल गया।
गाँव से बाहर निकलते ही सड़क सुनसान हो गई। चाँदनी रात थी, लेकिन घने पेड़ों की वजह से सड़क पर अँधेरे के पैच बने हुए थे। हवा में एक अजीब सी खामोशी थी, जिसे झींगुरों की आवाज और भी डरावनी बना रही थी। रमेश के मन में कहीं न कहीं सुरेश की बातें घूम रही थीं, लेकिन उसने अपने डर को झिड़क दिया।
जैसे ही वह उस पुराने पीपल के पेड़ के पास पहुँचा, उसकी बाइक अचानक बंद हो गई। उसने कई बार किक मारी, लेकिन बाइक स्टार्ट नहीं हुई। रमेश को गुस्सा आया। उसने अपनी मोबाइल की टॉर्च जलाई और बाइक को देखने लगा।
तभी उसे किसी के सिसकने की आवाज सुनाई दी।
आवाज पेड़ की तरफ से आ रही थी। उसने टॉर्च उस दिशा में घुमाई। पेड़ के नीचे एक औरत सफेद साड़ी पहने बैठी थी, उसका चेहरा उसके लंबे, काले बालों से ढका हुआ था। वह अपने घुटनों में सिर छिपाकर रो रही थी।
रमेश के दिल में एक पल के लिए डर जागा, लेकिन फिर उसे लगा कि शायद कोई महिला मुसीबत में है। उसने हिम्मत करके पूछा, “कौन हैं आप? इस वक्त यहाँ अकेली क्या कर रही हैं? क्या आपको कोई मदद चाहिए?”
औरत ने धीरे से अपना सिर उठाया। चाँद की हल्की रोशनी में उसका चेहरा बेहद खूबसूरत लग रहा था। उसकी बड़ी-बड़ी आँखों में आँसू थे। उसकी आवाज में एक अजीब सी कशिश थी। “मेरा गाँव यहीं पास में है, लेकिन मेरे पैर में मोच आ गई है। क्या आप मुझे मेरे घर तक छोड़ सकते हैं?”
रमेश को उस पर दया आ गई। उसने कहा, “मेरी बाइक खराब हो गई है, लेकिन आप चिंता न करें। मैं देखता हूँ।” वह बाइक को फिर से स्टार्ट करने की कोशिश करने लगा। इस बार, बाइक एक ही किक में स्टार्ट हो गई। रमेश को थोड़ी हैरानी हुई।
उसने औरत से कहा, “आइए, बैठ जाइए।”
वह औरत धीरे-धीरे चलकर बाइक के पास आई। जैसे ही वह बैठने लगी, रमेश की नजर अनजाने में उसके पैरों पर पड़ी।
और जो उसने देखा, उससे उसकी रूह काँप गई। उसके पैर… आगे की तरफ नहीं, बल्कि पीछे की तरफ मुड़े हुए थे।
सुरेश के शब्द उसके कानों में गूंजने लगे – ‘उसके पैर उल्टे हैं।’
रमेश का पूरा शरीर ठंडा पड़ गया। उसका दिमाग सुन्न हो गया था। वह औरत अब भी मुस्कुरा रही थी, लेकिन अब उसकी मुस्कान रमेश को दुनिया की सबसे खौफनाक चीज लग रही थी।
“क्या हुआ? चलो न,” उस औरत ने कहा, उसकी आवाज अब पहले जैसी मीठी नहीं थी। उसमें एक खनक थी, एक शैतानी खनक।
रमेश ने बिना कुछ सोचे-समझे बाइक का एक्सीलेटर घुमा दिया। बाइक तेज रफ़्तार से आगे बढ़ गई। उसने पीछे मुड़कर देखने की हिम्मत नहीं की। उसे अपने पीछे एक चीख सुनाई दी, एक ऐसी चीख जो किसी इंसान की नहीं हो सकती थी। उसके बाद एक दिल दहला देने वाली हँसी का शोर था, जो हवा में गूँज रहा था और ऐसा लग रहा था जैसे उसका पीछा कर रहा हो।
रमेश ने बाइक की रफ़्तार और बढ़ा दी। उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह हवा में बाइक उड़ा रहा हो। डर के मारे उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। उसे बस अपनी दादी का चेहरा याद आ रहा था। वह बस किसी तरह घर पहुँचना चाहता था।
लगभग पंद्रह मिनट तक बिना रुके बाइक चलाने के बाद, जब उसे गाँव की लाइटें दिखीं, तब जाकर उसकी जान में जान आई। उसने घर के सामने जाकर जोर से ब्रेक लगाई और लगभग गिरते-गिरते बचा। वह बाइक वहीं फेंककर घर के अंदर भागा और दरवाजा जोर से बंद कर दिया।
दादी जाग रही थीं। रमेश को इस हालत में देखकर वह समझ गईं कि क्या हुआ है। रमेश का चेहरा सफेद पड़ चुका था, वह काँप रहा था और ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था। दादी ने उसे पानी पिलाया और उसके सिर पर हाथ फेरते हुए हनुमान चालीसा का पाठ करने लगीं।
उस रात रमेश को बहुत तेज बुखार आया। वह नींद में बड़बड़ाता रहा, “उल्टे पैर… उसके पैर उल्टे थे।”
अगली सुबह, जब रमेश की हालत थोड़ी सुधरी, तो उसने अपनी दादी को सारी बात बताई। दादी की आँखों में आँसू थे। उन्होंने कहा, “मैंने कहा था न बेटा, कुछ बातें हमारी समझ से परे होती हैं। वो कोई आम आत्मा नहीं है, वो एक अतृप्त चुड़ैल है जो अपनी अधूरी इच्छाओं के साथ भटक रही है।”
रमesh ने उस दिन के बाद कभी भी अंधविश्वास का मजाक नहीं उड़ाया। वह समझ गया था कि दुनिया में ऐसी भी ताकतें मौजूद हैं, जिन्हें विज्ञान नहीं समझा सकता। वह घटना उसके जीवन का एक ऐसा हिस्सा बन गई थी, जिसे वह कभी नहीं भूल सकता था। यह डरावनी कहानी अब सिर्फ गाँव वालों की नहीं, बल्कि उसकी अपनी कहानी बन चुकी थी। उसने अपने दोस्त विकास को फोन करके कोई और बहाना बना दिया और कुछ दिन बाद चुपचाप शहर लौट आया।
आज भी रामपुर गाँव में उस पीपल के पेड़ के पास से लोग सूरज ढलने के बाद गुजरने से डरते हैं। कहते हैं कि वह चुड़ैल आज भी वहाँ किसी अकेले मुसाफिर का इंतजार करती है, अपनी अधूरी कहानी को पूरा करने के लिए। यह असली चुड़ैल की कहानी की तरह गाँव के हर बच्चे की जुबान पर है, एक चेतावनी के रूप में, एक खौफ के रूप में।
FAQs
प्रश्न: चुड़ैल कैसी दिखती है?
उत्तर: लोककथाओं और कहानियों के अनुसार, चुड़ैल अक्सर एक खूबसूरत महिला का रूप धारण कर सकती है ताकि वह इंसानों को धोखा दे सके। हालांकि, उसकी सबसे बड़ी पहचान उसके उल्टे पैर (पीछे की ओर मुड़े हुए पंजे) होते हैं। अपने असली रूप में, उसे लंबे बिखरे बाल, भयानक आँखें और लंबे नाखूनों के साथ चित्रित किया जाता है।
प्रश्न: कोई औरत चुड़ैल क्यों बनती है?
उत्तर: मान्यताओं के अनुसार, जब किसी महिला की अप्राकृतिक या दर्दनाक मृत्यु होती है, जैसे हत्या, आत्महत्या या किसी हादसे में, और उसकी अंतिम इच्छाएं अधूरी रह जाती हैं, तो उसकी आत्मा को शांति नहीं मिलती। ऐसी आत्मा गुस्से और बदले की भावना से भरकर एक शक्तिशाली और दुष्ट आत्मा बन जाती है, जिसे चुड़ैल कहा जाता है।
प्रश्न: चुड़ैल क्या करती है?
उत्तर: चुड़ैल को एक दुष्ट आत्मा माना जाता है जो इंसानों को, खासकर पुरुषों को नुकसान पहुँचाती है। वह अक्सर सुनसान जगहों, जैसे पुराने पेड़ों, खंडहरों या श्मशान घाटों पर रहती है। वह लोगों को अपने वश में कर सकती है, उन्हें बीमार कर सकती है या उनकी जान भी ले सकती है।
प्रश्न: चुड़ैल से कैसे बचा जा सकता है?उत्तर: लोक मान्यताओं में चुड़ैल से बचने के कई तरीके बताए गए हैं। माना जाता है कि चुड़ैल लोहे से डरती है, इसलिए अपने पास लोहे की कोई वस्तु रखना सुरक्षात्मक हो सकता है। इसके अलावा, हनुमान चालीसा जैसे धार्मिक मंत्रों का जाप करना, पवित्र धागा पहनना और घर में गंगाजल छिड़कना भी चुड़ैल जैसी नकारात्मक शक्तियों से बचाने में कारगर माना जाता है।
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