Murgi Ke Ande Akbar Birbal Story | Hindi Moral Story

Murgi Ke Ande

मुगल साम्राज्य के इतिहास में बादशाह अकबर और उनके चतुर मंत्री बीरबल के किस्से आज भी बड़े चाव से सुने और पढ़े जाते हैं। बीरबल की हाजिरजवाबी और तीक्ष्ण बुद्धि का कोई सानी नहीं था। बीरबल की इसी लोकप्रियता से दरबार के अन्य दरबारी अक्सर ईर्ष्या करते थे और उन्हें नीचा दिखाने के बहाने ढूंढते रहते थे। स्वयं बादशाह अकबर भी कभी-कभी बीरबल की परीक्षा लेने और उन्हें निरुत्तर करने के लिए मजेदार योजनाएं बनाते थे। ऐसी ही एक बेहद दिलचस्प और गुदगुदाने वाली कहानी है “मुर्गी के अंडे”। आइए जानते हैं कि कैसे बीरबल ने अपनी चतुराई से बादशाह के एक और अनोखे जाल को छिन्न-भिन्न कर दिया।

बादशाह अकबर की अनोखी योजना

एक दिन, दरबार शुरू होने से पहले बादशाह अकबर के मन में बीरबल की फिरकी लेने का विचार आया। वे चाहते थे कि इस बार बीरबल सबके सामने लाजवाब हो जाएं और अपनी हार स्वीकार करें। इसके लिए अकबर ने अन्य दरबारियों के साथ मिलकर एक गुप्त योजना बनाई।

अकबर ने सभी दरबारियों को चुपके से एक-एक मुर्गी का अंडा दे दिया और हिदायत दी कि वे इसे अपने वस्त्रों में छिपाकर रखें। बादशाह ने उनसे कहा, “कल सुबह जब मैं बीरबल के साथ शाही तालाब पर जाऊंगा, तो तुम सब भी वहां उपस्थित रहना। जब मैं कहूं, तो तुम सब तालाब में डुबकी लगाना और बाहर आते समय यह अंडा हाथ में लेकर दिखाना।” सभी दरबारी इस योजना से बेहद खुश हुए क्योंकि उन्हें लगा कि इस बार बीरबल निश्चित रूप से फंस जाएंगे।

शाही तालाब पर परीक्षा

अगली सुबह, योजना के अनुसार बादशाह अकबर, बीरबल और सभी दरबारी शाही बगीचे में बने तालाब के किनारे एकत्र हुए। मौसम सुहावना था, लेकिन दरबारियों के चेहरों पर एक अजीब सी उत्सुकता और कुटिल मुस्कान थी।

अकबर ने गंभीर आवाज में कहा, “बीरबल! कल रात मेरे सपने में एक देवदूत आए थे। उन्होंने मुझसे कहा कि हमारे दरबार में कौन कितना वफादार है, इसकी परीक्षा ली जाए। देवदूत के अनुसार, जो भी सच्चा दरबारी है, वह जब इस पवित्र तालाब में डुबकी लगाएगा, तो उसे ईश्वर की कृपा से पानी के अंदर से एक अंडा प्राप्त होगा। जो खाली हाथ लौटेगा, वह धोखेबाज माना जाएगा।”

बीरबल शांत भाव से बादशाह की बातें सुन रहे थे। उन्हें तुरंत समझ आ गया कि दाल में कुछ काला है, लेकिन वे बिना कुछ बोले चुपचाप खड़े रहे।

दरबारियों की डुबकी और बीरबल की बारी

बादशाह अकबर ने सबसे पहले अन्य दरबारियों को तालाब में कूदने का आदेश दिया। एक-एक करके सभी दरबारियों ने तालाब में डुबकी लगाई। जब वे पानी से बाहर निकले, तो हर किसी के हाथ में एक-एक अंडा था। वे गर्व से चिल्लाने लगे, “जहांपनाह! देखिए, ईश्वर ने हमें हमारी वफादारी का इनाम दिया है!”

अकबर ने मुस्कुराते हुए बीरबल की तरफ देखा और कहा, “बीरबल, अब तुम्हारी बारी है। जाओ और अपनी वफादारी साबित करो। अगर तुम खाली हाथ लौटे, तो तुम्हें सजा दी जाएगी।”

बीरबल ने मुस्कुराते हुए हामी भरी और तालाब के ठंडे पानी में छलांग लगा दी। पानी के अंदर उन्होंने बहुत ढूंढने का नाटक किया, लेकिन उन्हें कोई अंडा नहीं मिला—मिलेगा भी कैसे, योजना तो सिर्फ बीरबल को फंसाने की थी!

बीरबल का अनोखा रूप: मुर्गा बने बीरबल

तालाब के अंदर ही बीरबल को पूरा माजरा समझ में आ गया। वे जान गए कि यह सब उन्हें नीचा दिखाने के लिए रची गई एक साजिश है। पानी से बाहर निकलते समय बीरबल के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी।

जैसे ही वे बाहर आए, उन्होंने अपने दोनों हाथों को बगल में दबाकर पंखों की तरह फड़फड़ाना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने जोर से आवाज निकाली—”कुकड़ूँ-कूँ! कुकड़ूँ-कूँ!”

बीरबल को इस तरह मुर्गे की तरह बांग देते देख बादशाह अकबर और सभी दरबारी अवाक रह गए। तालाब के किनारे सन्नाटा छा गया।

चतुर उत्तर और अकबर की हार

बादशाह अकबर ने हैरान होकर पूछा, “बीरबल! यह तुम क्या कर रहे हो? क्या तुम पागल हो गए हो? तुम अंडा ढूंढने गए थे और यहाँ मुर्गे की तरह चिल्ला रहे हो?”

बीरबल ने बड़ी ही विनम्रता और मुस्कान के साथ उत्तर दिया, “जहांपनाह! मुझे क्षमा करें। लेकिन सत्य तो यह है कि इस तालाब में केवल मुर्गियां ही तैर रही थीं। जिन मुर्गियों ने अंडे दिए, वे आपके दरबारी हैं। और मैं तो केवल एक साधारण मुर्गा हूँ! महाराज, भला एक मुर्गा अंडा कैसे दे सकता है? मुर्गे का काम तो सिर्फ बांग देना है, इसलिए मैंने बांग दी—कुकड़ूँ-कूँ!”

बीरबल का यह हाजिरजवाब सुनते ही बादशाह अकबर अपनी हंसी नहीं रोक पाए। अन्य सभी दरबारी, जो बीरबल को फंसाने की साजिश रच रहे थे, शर्म के मारे अपना सिर झुकाए खड़े रहे।

अकबर ने बीरबल की पीठ थपथपाई और कहा, “बीरबल, वाकई तुम्हारा कोई सानी नहीं है। तुम हर परिस्थिति से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ ही लेते हो।”

कहानी से सीख (Moral of the Story)

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बुद्धि और सूझबूझ से कठिन से कठिन और विषम परिस्थितियों का सामना आसानी से किया जा सकता है। जब कोई आपके खिलाफ साजिश रच रहा हो, तो घबराने के बजाय अपनी हाजिरजवाबी और शांत दिमाग से उस साजिश को उन्हीं पर उलटा किया जा सकता है।


Discover more from StoryDunia

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Share with

Scroll to Top

Discover more from StoryDunia

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading