Hathi Ka Wajan Akbar Birbal Ki Kahani | Hindi Moral Story

Hathi Ka Wajan

मुगल सल्तनत के सबसे प्रसिद्ध बादशाह जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर अपने दरबारियों की बुद्धि की परीक्षा लेने के लिए जाने जाते थे। उनके दरबार में नौ रत्न थे, जिनमें से बीरबल उनके सबसे प्रिय और बुद्धिमान सलाहकार थे। बीरबल अपनी हाजिरजवाबी, चतुर सोच और व्यावहारिक ज्ञान के लिए न केवल पूरे साम्राज्य में बल्कि इतिहास में भी अमर हो गए हैं। ऐसी ही एक बेहद दिलचस्प घटना तब घटी जब अकबर ने एक बेहद कठिन और लगभग असंभव सा सवाल दरबारियों के सामने रखा। यह कहानी है “हाथी का वजन” मापने की।

बादशाह अकबर की अनोखी मन्नत

एक बार की बात है, बादशाह अकबर का पसंदीदा शाही हाथी अचानक बहुत बीमार पड़ गया। वह हाथी बादशाह को बेहद प्रिय था, इसलिए उसकी बीमारी से अकबर बहुत चिंतित हो गए। उन्होंने राज्य के सबसे बड़े हकीमों और वैद्यों को बुलाया। अकबर ने मन ही मन मन्नत मांगी कि यदि उनका प्रिय हाथी पूरी तरह स्वस्थ हो गया, तो वह उस हाथी के वजन के बराबर सोना और अनाज गरीबों और जरूरतमंदों में दान करेंगे।

ईश्वर की कृपा और सही इलाज से कुछ ही दिनों में हाथी पूरी तरह से ठीक हो गया और पहले जैसा तंदुरुस्त हो गया। अकबर अपनी मन्नत पूरी करने के लिए बहुत उत्सुक थे। उन्होंने तुरंत शाही खजांची को आदेश दिया कि हाथी के वजन के बराबर सोना और अनाज दान करने की तैयारी की जाए।

वजन मापने की बड़ी चुनौती

लेकिन, जैसे ही दान की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी, एक बहुत बड़ी व्यावहारिक समस्या सामने आ खड़ी हुई। शाही खजांची ने अकबर से कहा, “जहाँपनाह! मन्नत पूरी करने के लिए हमें सबसे पहले हाथी का सटीक वजन जानना होगा। लेकिन हमारे पास या पूरे राज्य में ऐसा कोई तराजू या तराजू की मशीन नहीं है जो इतने विशालकाय और भारी हाथी का वजन माप सके।”

अकबर ने पूरे राज्य में ढिंढोरा पिटवा दिया कि जो कोई भी इस शाही हाथी का सटीक वजन मापने का तरीका बताएगा या माप कर दिखाएगा, उसे एक हजार सोने की मोहरें इनाम में दी जाएंगी।

राज्य के बड़े-बड़े गणितज्ञ, वैज्ञानिक और बुद्धिजीवी दरबार में आए। किसी ने सुझाव दिया कि एक बहुत बड़ा लोहे का तराजू बनाया जाए, तो किसी ने कहा कि हाथी के अंगों को अलग-अलग करके तौला जाए (जिसे अकबर ने गुस्से में खारिज कर दिया)। कुछ लोगों का मानना था कि इतने बड़े हाथी का वजन करना बिल्कुल असंभव है। दिन बीतते जा रहे थे और अकबर अपनी मन्नत पूरी न कर पाने के कारण परेशान रहने लगे।

बीरबल की अनोखी और चतुर योजना

जब अकबर की चिंता बहुत बढ़ गई, तब उन्होंने हमेशा की तरह अपने सबसे भरोसेमंद वजीर बीरबल की तरफ रुख किया। बीरबल ने बादशाह की परेशानी सुनी और मुस्कुराते हुए कहा, “जहाँपनाह! आप व्यर्थ ही चिंतित हो रहे हैं। यह कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है। मुझे केवल एक दिन का समय दीजिए, मैं कल सुबह तक इस हाथी का सटीक वजन माप कर दिखा दूंगा।”

दरबार में बैठे बीरबल के विरोधी दरबारी मन ही मन खुश हो रहे थे कि इस बार बीरबल निश्चित रूप से असफल होगा और बादशाह के सामने उसकी किरकिरी होगी।

अगली सुबह, बीरबल ने बादशाह अकबर, शाही खजांची और अन्य दरबारियों को यमुना नदी के किनारे आने का निमंत्रण दिया। नदी के किनारे एक बहुत बड़ी शाही नाव खड़ी थी।

नाव और पानी का अनोखा गणित

जब सभी लोग नदी के किनारे पहुंचे, तो बीरबल ने महावत को आदेश दिया कि वह हाथी को पानी में खड़ी नाव पर चढ़ाए। जैसे ही विशाल हाथी नाव पर सवार हुआ, हाथी के भारी वजन के कारण नाव पानी में काफी नीचे तक धंस गई।

बीरबल ने तुरंत पानी की सतह के समानांतर नाव के उस हिस्से पर एक गहरा निशान लगा दिया, जहां तक नाव पानी में डूबी थी। इसके बाद बीरबल ने हाथी को नाव से नीचे उतारने के लिए कहा। हाथी के उतरते ही नाव वापस पानी के ऊपर आ गई।

अब बीरबल ने शाही खजांची से कहा, “खजांची जी, अब आप इस खाली नाव में सोने के सिक्के, मोहरें और अनाज की बोरियां तब तक भरवाते रहिए, जब तक कि नाव पानी में ठीक उसी निशान तक न डूब जाए, जो निशान मैंने अभी लगाया था।”

खजांची ने तुरंत सैनिकों को आदेश दिया और नाव में धीरे-धीरे सोना और अनाज भरा जाने लगा। जैसे ही नाव पानी में बीरबल द्वारा लगाए गए निशान तक डूब गई, बीरबल ने चिल्लाकर कहा, “बस! रुक जाइए। नाव में रखी गई इस कुल सामग्री का वजन ही इस शाही हाथी का सटीक वजन है।”

बादशाह अकबर हुए गदगद

बीरबल की इस अद्भुत और वैज्ञानिक तरकीब को देखकर बादशाह अकबर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दरबार के सभी विरोधी दरबारी भी हैरान रह गए और उनके पास बीरबल की तारीफ करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। बीरबल ने आर्कमिडीज के सिद्धांत (विस्थापन का नियम) का उपयोग अनजाने में ही सही, लेकिन बेहद व्यावहारिक रूप से किया था।

अकबर ने तुरंत बीरबल की पीठ थपथपाई और वादे के अनुसार उन्हें एक हजार सोने की मोहरें और कीमती उपहार इनाम में दिए। इसके बाद अकबर ने अपनी मन्नत के अनुसार गरीबों में वह सारा सोना और अनाज बांट दिया।

कहानी से सीख (Moral of the Story)

अकबर बीरबल की इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि चाहे कितनी भी बड़ी और कठिन समस्या क्यों न हो, यदि हम शांत दिमाग और व्यावहारिक सोच (Common Sense) का उपयोग करें, तो हर मुश्किल का आसान और प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।


Discover more from StoryDunia

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Share with

Scroll to Top

Discover more from StoryDunia

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading