Teen Murtiyan Akbar Birbal Story | Hindi Moral Story

Teen Murtiyan

बहादुर और बुद्धिमान लोगों से सजे मुगल सम्राट अकबर के दरबार की चर्चा दूर-दूर तक थी। अकबर के नवरत्नों में सबसे चतुर और हाजिरजवाब बीरबल थे, जो अपनी कुशाग्र बुद्धि से हर कठिन से कठिन समस्या का हल चुटकियों में निकाल लेते थे। यही कारण था कि कई लोग बीरबल से ईर्ष्या भी करते थे, लेकिन बीरबल की बुद्धिमत्ता का लोहा सभी को मानना ही पड़ता था।

एक दिन, बादशाह अकबर के दरबार में सुदूर देश से आया एक धनी और कलाप्रेमी व्यापारी आया। उसके पास कला की कई अनोखी और कीमती चीजें थीं। उसने दरबार में आकर महाराज अकबर को प्रणाम किया और कहा, “जहाँपनाह! मैंने आपकी बुद्धिमत्ता और आपके दरबारियों की चतुरता के बहुत किस्से सुने हैं। इसीलिए मैं आज आपके दरबार में न्याय और परीक्षा के उद्देश्य से आया हूँ।”

व्यापारी के साथ उसके सेवक भी थे, जिनके हाथों में मखमली कपड़े से ढकी हुई तीन वस्तुएँ थीं। व्यापारी ने इशारा किया, और सेवकों ने उन वस्तुओं पर से कपड़ा हटा दिया। दरबार में उपस्थित सभी लोग चकित रह गए। वहाँ पीतल की बनी हुई तीन बेहद खूबसूरत मूर्तियाँ रखी थीं।

अनोखी चुनौती और उलझन

तीनों मूर्तियाँ कद, काठी, रूप-रंग, चमक और वजन में बिल्कुल एक समान थीं। उन्हें देखकर कोई भी यह नहीं कह सकता था कि उनमें कोई अंतर है।

व्यापारी ने मुस्कुराते हुए अकबर से कहा, “जहाँपनाह! ये तीनों मूर्तियाँ दिखने में पूरी तरह एक जैसी हैं। लेकिन इनमें से एक मूर्ति सबसे घटिया है, दूसरी मध्यम दर्जे की है और तीसरी मूर्ति सबसे उत्तम कोटि की यानी सर्वश्रेष्ठ है। मेरी चुनौती यह है कि आपके दरबार का कोई भी ज्ञानी व्यक्ति बिना इन मूर्तियों को तोड़े-फोड़े या नुकसान पहुँचाए, यह बता दे कि इनमें से कौन सी मूर्ति सर्वश्रेष्ठ है, कौन सी मध्यम और कौन सी सबसे खराब। यदि कोई ऐसा कर देगा, तो मैं ये तीनों मूर्तियाँ आपके दरबार को उपहार स्वरूप भेंट कर दूँगा। अन्यथा, आपको मुझे मान-सम्मान के साथ भारी पुरस्कार देना होगा।”

बादशाह अकबर को यह चुनौती बेहद सरल लगी। उन्होंने अपने दरबार के वरिष्ठ मंत्रियों और सलाहकारों को आगे आने को कहा। एक-एक करके कई दरबारी उठी, उन्होंने मूर्तियों को हाथ लगाकर देखा, उन्हें करीब से निहारा, उनका वजन तौला, लेकिन सभी असमंजस में पड़ गए। मूर्तियाँ हर तराजू पर, हर नजर से एकदम समान थीं।

हार मानकर सभी दरबारी अपनी सीटों पर वापस बैठ गए। दरबार में सन्नाटा पसर गया। अकबर को चिंता होने लगी कि कहीं उनके दरबार की प्रतिष्ठा दांव पर न लग जाए। अंततः, अकबर ने अपने सबसे भरोसेमंद वजीर बीरबल की ओर देखा। बीरबल मुस्कुराए और अपनी जगह से खड़े हो गए।

बीरबल की चतुराई और परीक्षण

बीरबल मूर्तियों के पास गए और उन्हें बहुत ध्यान से देखने लगे। उन्होंने मूर्तियों के चारों तरफ चक्कर लगाया। अचानक, बीरबल की नजर मूर्तियों के कानों पर पड़ी। उन्होंने सैनिकों से घास का एक तिनका या एक पतला लोहे का तार लाने को कहा।

दरबारियों को समझ नहीं आ रहा था कि बीरबल भला घास के तिनके से मूर्तियों की परीक्षा कैसे करेंगे। कुछ लोग मन ही मन खुश हो रहे थे कि आज बीरबल निश्चित रूप से असफल हो जाएँगे।

सैनिक ने बीरबल को एक पतला और लचीला तार लाकर दिया। बीरबल ने पहली मूर्ति उठाई और उसके कान के छेद में उस तार को डाला। धीरे-धीरे तार अंदर गया और वह पहली मूर्ति के दूसरे कान से बाहर निकल आया।

बीरबल ने मुस्कुराते हुए उस मूर्ति को एक तरफ रख दिया और कहा, “यह पहली मूर्ति है, जो सबसे घटिया श्रेणी की है।”

इसके बाद, बीरबल ने दूसरी मूर्ति उठाई और उसके कान में भी वही तार डाला। इस बार तार कान से होते हुए मूर्ति के मुँह से बाहर आ गया।

बीरबल ने उसे भी एक तरफ रखा और कहा, “यह दूसरी मूर्ति है, जो मध्यम श्रेणी की है।”

अब बीरबल ने तीसरी मूर्ति उठाई और उसके कान में तार डाला। इस बार तार न तो दूसरे कान से बाहर आया और न ही मुँह से। वह तार सीधे मूर्ति के पेट के अंदर चला गया।

बीरबल ने गर्व से अकबर और उस व्यापारी की ओर देखा और कहा, “जहाँपनाह! यह तीसरी मूर्ति ही सर्वश्रेष्ठ है।”

रहस्य का अनावरण और जीवन की सीख

व्यापारी हैरान रह गया। उसने कौतूहलवश पूछा, “बीरबल! तुमने बिल्कुल सही पहचान की है। लेकिन क्या तुम दरबार को यह समझा सकते हो कि तुमने यह निष्कर्ष कैसे निकाला? आखिर इन तीनों मूर्तियों का रहस्य क्या है?”

बीरबल ने बहुत ही सुंदर तरीके से इसका उत्तर दिया:

  1. पहली मूर्ति (घटिया): “इस मूर्ति के एक कान में तार डालने पर वह दूसरे कान से बाहर आ गया। यह उन लोगों को दर्शाती है जो एक कान से किसी की अच्छी या ज्ञान की बात सुनते हैं और तुरंत उसे दूसरे कान से बाहर निकाल देते हैं। ऐसे लोग जीवन में कभी कुछ सीख नहीं पाते, इसलिए यह मूर्ति सबसे घटिया है।”
  2. दूसरी मूर्ति (मध्यम): “इस मूर्ति के कान में तार डालने पर वह मुँह से बाहर आया। यह उन लोगों का प्रतीक है जो कोई भी गुप्त या गंभीर बात सुनते ही उसे पचा नहीं पाते और तुरंत दूसरों के सामने बक देते हैं। ऐसे लोग भरोसेमंद नहीं होते, इसलिए यह मध्यम श्रेणी की है।”
  3. तीसरी मूर्ति (सर्वश्रेष्ठ): “तीसरी मूर्ति के कान में डाला गया तार सीधे पेट में चला गया। यह उन श्रेष्ठ और बुद्धिमान लोगों को दर्शाती है जो दूसरों की बातों को ध्यान से सुनते हैं, रहस्य को अपने भीतर संजोकर रखते हैं और कभी किसी का विश्वास नहीं तोड़ते। ऐसे लोग ही समाज का मार्गदर्शन करते हैं और सर्वश्रेष्ठ कहलाते हैं।”

बीरबल की इस बुद्धिमत्तापूर्ण और दार्शनिक व्याख्या को सुनकर पूरा दरबार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। विदेशी व्यापारी ने बीरबल के आगे सिर झुकाया और सहर्ष तीनों कीमती मूर्तियाँ राजा अकबर को भेंट कर दीं। बादशाह अकबर ने बीरबल की पीठ थपथपाई और उन्हें सोने के आभूषणों से पुरस्कृत किया।


Discover more from StoryDunia

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Share with

Scroll to Top

Discover more from StoryDunia

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading