Surya Poorv Se Kyon Ugta Hai? Akbar Birbal Story

Surya Poorv Se Kyon Ugta Hai

एक समय की बात है, मुगल सल्तनत के सबसे प्रसिद्ध बादशाह जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का दरबार सजा हुआ था। दरबार में सभी मंत्री, दरबारी और बुद्धिमान लोग उपस्थित थे। हमेशा की तरह आज भी बादशाह अकबर के मन में कुछ अनोखे और पेचीदा सवाल घूम रहे थे। अकबर को अक्सर ऐसे सवाल पूछने की आदत थी, जो पहली नजर में बेहद साधारण लगते थे, लेकिन उनका जवाब देना उतना ही कठिन होता था।

दरबार की कार्यवाही शुरू होते ही बादशाह अकबर ने अपने सिंहासन से उठकर सभी दरबारियों की तरफ देखा। उनके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी। उन्होंने जोर से घोषणा की, “सभासदों! आज मेरे मन में एक अनोखा प्रश्न आया है। हम सब जानते हैं कि सूर्य रोज सुबह उगता है। लेकिन क्या कोई मुझे यह बता सकता है कि सूर्य हमेशा पूर्व दिशा से ही क्यों उगता है? वह पश्चिम, उत्तर या दक्षिण से क्यों नहीं उगता?”

दरबारियों की उलझन और वैज्ञानिक तर्क

बादशाह का यह अजीब सवाल सुनकर पूरे दरबार में सन्नाटा छा गया। दरबारी एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे। कुछ मंत्रियों ने आपस में कानाफूसी शुरू कर दी।

तभी दरबार के मुख्य ज्योतिषी और पंडित जी आगे आए। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, “जहाँपनाह! यह तो सृष्टि का नियम है। वेदों और शास्त्रों में लिखा है कि सूर्य देव पूर्व दिशा के स्वामी हैं, इसलिए वे वहीं से उदय होते हैं। यह प्रकृति का शाश्वत नियम है।”

अकबर ने सिर हिलाया और कहा, “पंडित जी, यह तो धार्मिक व्याख्या हुई। मुझे कोई ऐसा उत्तर चाहिए जो तर्कसंगत हो और जिसमें कुछ नयापन हो।”

इसके बाद दरबार के वैज्ञानिक और भूगोलवेत्ता आगे बढ़े। उन्होंने अपनी लंबी दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए कहा, “हुजूर! पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर अपनी धुरी पर घूमती है। इसी घूर्णन के कारण हमें ऐसा प्रतीत होता है कि सूर्य पूर्व से उदय हो रहा है और पश्चिम में अस्त हो रहा है। यह पूरी तरह से खगोलीय घटना है।”

बादशाह अकबर इस जवाब से भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा, “यह तो किताबी ज्ञान है जो हर कोई जानता है। मुझे कुछ ऐसा उत्तर चाहिए जो सीधा, सरल और मेरे दिल को छू जाए।”

बीरबल की हाजिरजवाबी और अनोखा तर्क

जब कोई भी दरबारी अकबर को संतुष्ट नहीं कर पाया, तो हमेशा की तरह बादशाह की नजरें बीरबल पर जाकर टिक गईं। बीरबल शांत भाव से अपनी जगह पर खड़े थे और उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी।

अकबर ने मुस्कुराते हुए कहा, “बीरबल! क्या तुम्हारे पास इस प्रश्न का कोई ऐसा उत्तर है जो इन सभी किताबी और धार्मिक तर्कों से अलग हो?”

बीरबल आगे आए, बादशाह को झुककर सलाम किया और बोले, “जहाँपनाह! इस प्रश्न का उत्तर बहुत ही सरल और सीधा है। लेकिन इसके लिए आपको थोड़ा धैर्य रखना होगा।”

अकबर ने कहा, “शौक से कहो बीरबल, हम तुम्हारा उत्तर सुनने के लिए बेहद उत्सुक हैं।”

बीरबल ने गंभीर आवाज में कहना शुरू किया, “जहाँपनाह, वास्तव में सूर्य देव पहले किसी भी दिशा से उगने के लिए स्वतंत्र थे। वे कभी उत्तर तो कभी दक्षिण से भी उग जाया करते थे। लेकिन जब से इस धरती पर आपका शासन स्थापित हुआ है, तब से सूर्य देव ने केवल पूर्व से ही उगने का निर्णय लिया।”

अकबर चौंक गए और उत्सुकता से पूछा, “भला ऐसा क्यों बीरबल? मेरे शासनकाल से सूर्य के उगने का क्या संबंध है?”

बीरबल ने अपनी बुद्धि का परिचय देते हुए कहा, “हुजूर! बात यह है कि आप इस संसार के सबसे प्रतापी, न्यायप्रिय और तेजस्वी सम्राट हैं। आपकी कीर्ति और यश पूरे विश्व में फैला हुआ है। सूर्य देव भली-भांति जानते हैं कि जब वे पूर्व दिशा से उदय होते हैं, तो उनका सामना सीधे आपके महल और आपकी महानता से होता है।”

बीरबल ने आगे समझाया, “अगर सूर्य देव पश्चिम दिशा से उगेंगे, तो उनकी पीठ आपकी सल्तनत और आपकी तरफ होगी। हमारे शास्त्रों और मर्यादा के अनुसार, किसी महान राजा और सूर्य के समान प्रतापी शासक की तरफ पीठ करना घोर अपमान माना जाता है। इसलिए, आपके प्रति अपना सम्मान प्रकट करने के लिए और हमेशा आपके सामने नतमस्तक होने के लिए, सूर्य देव हर सुबह पूर्व दिशा से उदय होते हैं ताकि वे सीधे आपके दर्शन कर सकें और आपको प्रणाम कर सकें।”

दरबार में गूंज उठी तालियां

बीरबल का यह अनूठा, प्रशंसा से भरा और चतुर उत्तर सुनकर बादशाह अकबर का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। वे बीरबल की इस हाजिरजवाबी और कल्पनाशीलता से बेहद प्रभावित हुए। दरबारी भी बीरबल की इस चतुराई को देखकर दंग रह गए। जो सवाल सबको हैरान कर रहा था, उसका बीरबल ने इतना मजेदार और सम्मानजनक मोड़ देकर उत्तर दिया था।

बादशाह अकबर जोर से हंस पड़े और बोले, “वाह बीरबल! लाजवाब! तुम्हारी बुद्धि और हाजिरजवाबी का कोई सानी नहीं है। तुमने न सिर्फ मेरे सवाल का जवाब दिया, बल्कि हमें खुश भी कर दिया।”

अकबर ने तुरंत अपने गले से बहुमूल्य मोतियों का हार निकाला और बीरबल को उपहार स्वरूप भेंट कर दिया। इस तरह बीरबल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बुद्धि और चतुराई से किसी भी कठिन या बेतुके सवाल का खूबसूरत हल निकाला जा सकता है।


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