
महान मुगल सम्राट अकबर के दरबार में नौ रत्न थे, जिनमें से बीरबल अपनी तीक्ष्ण बुद्धि, हाजिरजवाबी और बुद्धिमत्ता के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध थे। बीरबल की लोकप्रियता से जलने वाले दरबारियों की भी कोई कमी नहीं थी, जो अक्सर बीरबल को नीचा दिखाने के लिए नए-नए षड्यंत्र रचते रहते थे। बादशाह अकबर भी कभी-कभी बीरबल की परीक्षा लेने के लिए उनके सामने बेहद कठिन और असंभव से प्रतीत होने वाले सवाल या मांग रख देते थे। ऐसी ही एक बेहद दिलचस्प घटना है ‘बैल का दूध’ लाने की मांग। आइए जानते हैं इस मजेदार और शिक्षाप्रद कहानी को।
अकबर की अनोखी मांग
एक दिन दरबार की कार्यवाही चल रही थी। बादशाह अकबर का मूड कुछ मजाक करने का था। उन्होंने बीरबल की परीक्षा लेने की सोची। अकबर ने पूरे दरबार के सामने बीरबल की तरफ देखा और गंभीर आवाज में कहा, “बीरबल, हमें रात को सोते समय एक सपना आया। सपने में हमने देखा कि एक स्वस्थ बैल दूध दे रहा है। हमें वह दूध पीना है। इसलिए, हम तुम्हें आदेश देते हैं कि अगले तीन दिनों के भीतर हमारे लिए ‘बैल का दूध’ लेकर आओ। यदि तुम ऐसा करने में असमर्थ रहे, तो तुम्हें कड़ी सजा दी जाएगी।”
बादशाह की यह अजीबोगरीब मांग सुनकर पूरे दरबार में सन्नाटा छा गया। बीरबल के विरोधी दरबारी मन ही मन बेहद खुश हो रहे थे कि इस बार बीरबल का बचना नामुमकिन है, क्योंकि दुनिया का कोई भी व्यक्ति बैल से दूध नहीं निकाल सकता। बैल एक नर पशु है, और नर पशु का दूध देना प्राकृतिक रूप से असंभव है।
बीरबल ने बादशाह की इस अनुचित और असंभव मांग को शांत मन से सुना। वे समझ गए कि बादशाह केवल उनकी बुद्धिमत्ता की परीक्षा ले रहे हैं। बीरबल ने मुस्कुराते हुए सिर झुकाया और कहा, “जहाँपनाह! आपका हुक्म सिर माथे पर। मुझे तीन दिन की मोहलत दी जाए, मैं अवश्य ही आपके लिए बैल का दूध लेकर हाजिर हो जाऊंगा।”
बीरबल की चिंता और चतुर बेटी का प्रवेश
दरबार से छुट्टी होने के बाद बीरबल अपने घर पहुंचे। वे गहरे विचारों में खोए हुए थे और उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं। उनकी बुद्धिमान और चतुर बेटी ने जब अपने पिता को इस तरह चिंतित देखा, तो उसने उनके पास जाकर पूछा, “पिताजी, क्या बात है? आज आप बहुत परेशान लग रहे हैं? क्या दरबार में कोई अनहोनी हो गई है?”
बीरबल ने अपनी बेटी को पूरी बात बताई कि कैसे बादशाह अकबर ने उनसे तीन दिनों के भीतर ‘बैल का दूध’ लाने की मांग की है। बीरबल ने कहा, “पुत्री, बैल का दूध लाना बिल्कुल असंभव है। यह केवल मुझे अपमानित करने और फंसाने की एक चाल है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि इस असंभव मांग का क्या उत्तर दूँ।”
उनकी बेटी ने पिता की बात को बहुत ध्यान से सुना और मुस्कुराते हुए कहा, “पिताजी, आप व्यर्थ ही चिंता कर रहे हैं। इस समस्या का समाधान बेहद सरल है। आप यह काम मुझ पर छोड़ दीजिए। मैं बादशाह अकबर को उनकी इस बेतुकी मांग का ऐसा जवाब दूँगी कि वे खुद अपनी मांग वापस ले लेंगे। बस आप मुझे अनुमति दीजिए।”
बीरबल अपनी बेटी की बुद्धिमत्ता से अच्छी तरह वाकिफ थे, इसलिए उन्होंने उसे अनुमति दे दी।
आधी रात का तमाशा
बीरबल की बेटी ने एक बेहतरीन योजना बनाई। तीसरे दिन की आधी रात को, जब पूरी दुनिया सो रही थी और चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था, वह महल के ठीक पीछे बहने वाली यमुना नदी के घाट पर पहुंची। वह अपने साथ कुछ पुराने कपड़े और एक बड़ा बर्तन लेकर आई थी।
उसने जानबूझकर महल की खिड़कियों के ठीक नीचे कपड़े धोने का नाटक शुरू किया। वह कपड़ों को जोर-जोर से पत्थर पर पछाड़ने लगी, जिससे ‘थाप-थाप’ की तेज आवाजें गूंजने लगीं। शांत रात में यह आवाज इतनी तेज थी कि सीधे महल के भीतर सो रहे बादशाह अकबर के कानों तक पहुंची।
बार-बार आ रही इस आवाज से बादशाह अकबर की नींद टूट गई। वे अत्यधिक क्रोधित हो गए कि आधी रात को उनके महल के पीछे कौन दुस्साहसी कपड़े धो रहा है। अकबर ने तुरंत अपने सैनिकों को आदेश दिया, “जाओ और देखो कि आधी रात को नदी किनारे कौन उपद्रव मचा रहा है, उसे तुरंत हमारे सामने पेश करो।”
जब अकबर को मिला करारा जवाब
सैनिक तुरंत नदी के घाट पर पहुंचे और उन्होंने देखा कि एक युवा लड़की वहां कपड़े धो रही है। वे उसे बंदी बनाकर तुरंत बादशाह अकबर के सामने ले आए।
अकबर ने गुस्से में लाल-पीले होते हुए उस लड़की से पूछा, “लड़की! तुम कौन हो और तुम्हारी इतनी हिम्मत कैसे हुई कि तुम आधी रात को हमारे महल के पीछे कपड़े धोकर हमारी नींद खराब करो? क्या तुम्हें अपनी जान का डर नहीं है?”
लड़की ने अत्यंत विनम्रतापूर्वक हाथ जोड़े और डरने का अभिनय करते हुए कहा, “जहाँपनाह! मुझे क्षमा करें। मेरा इरादा आपकी नींद खराब करने का बिल्कुल नहीं था। लेकिन मेरी मजबूरी ऐसी थी कि मुझे इसी समय कपड़े धोने पड़े।”
अकबर ने पूछा, “ऐसी क्या मजबूरी थी जो तुम्हें आधी रात को कपड़े धोने पड़े? सच-सच बताओ!”
लड़की ने मासूमियत से उत्तर दिया, “महाराज, दरअसल आज शाम को ही मेरे पूज्य पिताजी ने एक अत्यंत सुंदर और स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। घर में खुशी का माहौल है, लेकिन बच्चे के जन्म के कारण बहुत सारे गंदे कपड़े जमा हो गए थे। दिनभर मुझे समय नहीं मिला, इसलिए मुझे रात के समय आकर ये कपड़े धोने पड़े ताकि सुबह तक बच्चे और पिता के लिए साफ कपड़े तैयार हो सकें।”
यह सुनते ही बादशाह अकबर हक्के-बक्के रह गए। वे अपनी हंसी रोक नहीं पाए और फिर गुस्से में बोले, “मूर्ख लड़की! क्या तुम पागल हो गई हो? क्या कभी कोई पुरुष भी बच्चे को जन्म दे सकता है? तुम हमसे सफेद झूठ बोल रही हो। इस बेतुकी बात के लिए तुम्हें सजा दी जाएगी।”
लड़की ने तुरंत सिर उठाकर अकबर की आंखों में देखा और बहुत ही शांत लेकिन आत्मविश्वास भरे लहजे में कहा, “जहाँपनाह! यदि इस विशाल और महान साम्राज्य में एक बैल दूध दे सकता है, तो भला एक पुरुष बच्चे को जन्म क्यों नहीं दे सकता?”
यह सुनते ही बादशाह अकबर एकदम शांत हो गए। उनके दिमाग की बत्ती जल उठी। वे तुरंत समझ गए कि यह लड़की कोई साधारण लड़की नहीं है, बल्कि यह बीरबल की चतुर पुत्री है और यह पूरी योजना बीरबल की ही है ताकि उन्हें अपनी गलती का एहसास कराया जा सके।
अकबर ने मुस्कुराते हुए कहा, “तो तुम बीरबल की बेटी हो?”
लड़की ने मुस्कुराकर हामी भरी। अकबर ने बीरबल की बेटी की बुद्धिमत्ता और निडरता की भरपूर प्रशंसा की और बीरबल को भी बधाई दी। उन्होंने अपनी असंभव मांग को वापस ले लिया और बीरबल की बेटी को कीमती उपहार देकर विदा किया।
कहानी से सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि यदि कोई हमारे सामने असंभव या कठिन परिस्थिति उत्पन्न करे, तो हमें घबराने के बजाय अपनी बुद्धि और तार्किकता का उपयोग करना चाहिए। हर असंभव दिखने वाले प्रश्न का उत्तर शांति और चतुरता से दिया जा सकता है। जैसे लोहे को लोहा काटता है, वैसे ही बेतुके दावों का जवाब तर्कपूर्ण और चतुराई भरे व्यवहार से ही दिया जा सकता है।
Discover more from StoryDunia
Subscribe to get the latest posts sent to your email.











