
मुगल सल्तनत के सबसे प्रसिद्ध बादशाह अकबर के दरबार में हमेशा ही ज्ञान, कला और बुद्धिमत्ता की चर्चा होती रहती थी। बादशाह अकबर को अनोखे सवाल पूछने और बीरबल को उन सवालों के चतुर उत्तर देते हुए देखना बेहद पसंद था। बीरबल अपनी हाजिरजवाबी और कुशाग्र बुद्धि से हर बार बादशाह का दिल जीत लेते थे। ऐसी ही एक सुबह, दरबार की कार्यवाही शुरू होने से पहले बादशाह अकबर का मूड थोड़ा मजाकिया था।
बादशाह अकबर ने मुस्कुराते हुए दरबारियों की तरफ देखा और पूछा, “क्या हमारे राज्य में कोई ऐसा व्यक्ति है जिसे हम ‘सबसे बड़ा पेटू’ कह सकें? कोई ऐसा, जिसकी भूख की कोई सीमा ही न हो?”
बादशाह का यह सवाल सुनते ही दरबारी एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे। तभी एक दरबारी आगे आया और सिर झुकाकर बोला, “जहाँपनाह! हमारे आगरा में ही एक ऐसा व्यक्ति रहता है जिसका नाम मोतीराम है। लोग उसे प्यार से और उसके काम की वजह से ‘बड़ा पेटू’ बुलाते हैं। वह एक बार में पचास लोगों का भोजन अकेले ही चट कर सकता है।”
बादशाह अकबर को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने तुरंत अपने सैनिकों को आदेश दिया, “जाओ, उस मोतीराम को ससम्मान दरबार में पेश किया जाए। हम खुद उसकी भूख की परीक्षा लेना चाहते हैं।”
मोतीराम का दरबार में आगमन और शाही चुनौती
कुछ ही समय में सैनिकों ने मोतीराम को दरबार में पेश किया। मोतीराम का शरीर काफी भारी-भरकम था और उसकी गोल मटोल तोंद उसकी भूख की गवाही दे रही थी। उसने झुककर बादशाह को सलाम किया।
अकबर ने उससे पूछा, “मोतीराम, हमने सुना है कि तुम इस राज्य के सबसे बड़े पेटू हो। क्या यह सच है?”
मोतीराम ने शर्माते हुए कहा, “जहाँपनाह, यह तो खुदा की देन है। मुझे भोजन से बेहद प्रेम है और मेरा पेट कभी जल्दी नहीं भरता।”
बादशाह ने मुस्कुराते हुए एक चुनौती रखी, “ठीक है! आज तुम्हारी परीक्षा होगी। अगर तुम हमारे शाही बावर्चीखाने में बना सारा भोजन खा गए, तो तुम्हें सोने की सौ अशर्फियां इनाम में दी जाएंगी। लेकिन अगर तुम हार गए, तो तुम्हें एक हफ्ते तक सिर्फ उबला हुआ पानी पीना होगा। क्या तुम्हें यह मंजूर है?”
मोतीराम के मुंह में पानी आ गया। उसने तुरंत चुनौती स्वीकार कर ली।
शाही दावत और ‘बड़ा पेटू’ का पराक्रम
शाही बावर्चीखाने से एक के बाद एक लजीज व्यंजन दरबार में लाए जाने लगे। गरमा-गरम बिरयानी, शाही कोरमा, मक्खन से लथपथ रोटियां, कचौड़ियां और तरह-तरह के मिष्ठान्न मोतीराम के सामने परोसे गए। मोतीराम ने बिना समय गंवाए भोजन करना शुरू कर दिया।
दरबार में मौजूद सभी लोग हैरान होकर उसे देख रहे थे। मोतीराम जिस तेजी से रोटियां और पुलाव गायब कर रहा था, उसे देखकर ऐसा लग रहा था मानो उसका पेट न होकर कोई गहरा कुआं हो। देखते ही देखते उसने भोजन से भरे दस बड़े थाल खाली कर दिए।
धीरे-धीरे मोतीराम की गति धीमी होने लगी। उसका पेट पूरी तरह तन चुका था और माथे पर पसीना आ गया था। आखिरकार, उसने अपने हाथ पीछे खींच लिए और डकार लेते हुए बोला, “जहाँपनाह! अब बस। मेरा पेट गले तक भर चुका है। अब यदि मैं पानी की एक बूंद भी पियूं, तो मेरा पेट फट जाएगा। अब मेरे अंदर एक दाना भी जाने की जगह नहीं बची है।”
बादशाह अकबर मुस्कुराए और बोले, “कोई बात नहीं मोतीराम, तुमने बहुत अच्छा प्रयास किया। लेकिन तुम चुनौती पूरी नहीं कर पाए।”
बीरबल की चतुराई और केसरिया खीर का जादू
तभी कोने में बैठे बीरबल मुस्कुराए। उन्होंने आगे आकर बादशाह से कहा, “जहाँपनाह, जरा रुकिए। मुझे लगता है कि मोतीराम के पेट में अभी थोड़ी जगह बाकी है।”
अकबर ने अचरज से कहा, “बीरबल, तुम खुद देख रहे हो कि मोतीराम हिल भी नहीं पा रहा है। वह खुद कह रहा है कि उसके पेट में जगह नहीं है। फिर तुम ऐसा कैसे कह सकते हो?”
बीरबल ने कहा, “जहाँपनाह, मुझे बस दो मिनट का समय दें।”
बीरबल तुरंत शाही रसोइये के पास गए और वहां से चांदी के कटोरे में गरमा-गरम, अत्यंत सुगंधित केसरिया खीर लेकर आए। उस खीर पर काजू, पिस्ता और बादाम सजे हुए थे और उसकी खुशबू पूरे दरबार में फैल गई थी।
जैसे ही खीर की खुशबू मोतीराम के नथुनों तक पहुंची, उसकी आंखों में चमक आ गई। बीरबल ने वह कटोरा मोतीराम के सामने रख दिया। मोतीराम ने बिना एक क्षण गंवाए कटोरा उठाया और सारी की सारी खीर पलक झपकते ही साफ कर गया।
यह देखकर बादशाह अकबर दंग रह गए। उन्होंने अचंभित होकर मोतीराम से पूछा, “मोतीराम! अभी कुछ देर पहले तुमने कहा था कि तुम्हारे पेट में एक दाने की भी जगह नहीं है। फिर तुमने यह पूरी खीर कैसे खा ली?”
कहानी की सीख: असली ‘बड़ा पेटू’ कौन?
मोतीराम ने हाथ जोड़कर बहुत ही सुंदर उत्तर दिया, “जहाँपनाह! बात ऐसी है कि जैसे जब सड़क पर बहुत भारी भीड़ हो और लोग एक-दूसरे से सटकर खड़े हों, लेकिन जैसे ही वहां राजा की सवारी आती है, तो भीड़ अपने आप हट जाती है और राजा के लिए रास्ता बन जाता है। ठीक उसी तरह, मेरे पेट में भोजन की भारी भीड़ थी, लेकिन जैसे ही इस स्वादिष्ट केसरिया खीर रूपी ‘राजा’ का आगमन हुआ, पेट के बाकी भोजन ने इसके लिए अपने आप रास्ता बना दिया!”
यह सुनते ही पूरा दरबार ठहाकों से गूंज उठा। बादशाह अकबर भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।
तभी बीरबल ने मुस्कुराते हुए अकबर से कहा, “जहाँपनाह, इस संसार में सबसे ‘बड़ा पेटू’ इंसान का पेट नहीं, बल्कि उसका मन और उसका लालच है। पेट तो भर जाता है, लेकिन स्वादिष्ट चीजों को देखकर इंसान का मन और उसकी इच्छाएं कभी नहीं भरतीं।”
बादशाह अकबर बीरबल की इस गहरी और दार्शनिक बात से बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने मोतीराम को उसकी हाजिरजवाबी और खाने की कला के लिए सोने की अशर्फियां इनाम में दीं और बीरबल को उनकी बुद्धिमानी के लिए हमेशा की तरह एक कीमती उपहार भेंट किया।
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