
मुग़ल बादशाह अकबर के दरबार में बुद्धि और चालाकी की परख होना एक आम बात थी। अकबर अक्सर बीरबल की बुद्धिमत्ता की परीक्षा लेने के लिए नए-नए और पेचीदा सवाल पूछा करते थे। बीरबल भी अपनी हाजिरजवाबी और कुशाग्र बुद्धि से हर बार बादशाह को निरुत्तर कर देते थे। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा तब हुआ, जब अकबर ने बीरबल के सामने एक बेहद अजीब मांग रखी। बादशाह चाहते थे कि बीरबल उनके सामने राज्य के सबसे बड़े ‘मूर्ख’ और सबसे बड़े ‘चालाक’ इंसान को पेश करें।
बादशाह अकबर की अनोखी मांग
एक दिन दरबार की कार्यवाही चल रही थी। तभी बादशाह अकबर के मन में एक विचार आया। उन्होंने बीरबल की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “बीरबल! हम चाहते हैं कि तुम हमारे साम्राज्य से दो ऐसे लोगों को ढूंढकर हमारे सामने लाओ, जिनमें से एक अत्यंत मूर्ख हो और दूसरा परम चालाक। इसके लिए हम तुम्हें एक सप्ताह का समय देते हैं।”
बीरबल ने हमेशा की तरह सिर झुकाकर बादशाह की आज्ञा स्वीकार की और कहा, “जहाँपनाह, आपकी आज्ञा का पालन अवश्य होगा। मुझे कुछ दिनों का समय दीजिए।”
मूर्ख की खोज (The Search for the Fool)
बीरबल अगले ही दिन से आगरा की गलियों और बाजारों में ऐसे लोगों की तलाश में निकल पड़े। काफी घूमने के बाद भी उन्हें आसानी से कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जिसे ‘परम मूर्ख’ कहा जा सके। कुछ दिनों बाद, जब बीरबल शहर के बाहरी इलाके से गुजर रहे थे, तो उन्हें एक बेहद अजीब नजारा दिखाई दिया।
एक आदमी घोड़े पर बैठा हुआ था, लेकिन उसने घास का एक बड़ा सा गट्ठर अपने सिर पर रख रखा था। वह घोड़े को तेजी से चलाने की कोशिश कर रहा था। बीरबल ने तुरंत अपना घोड़ा रोका और उस आदमी के पास जाकर पूछा, “अरे भाई! तुम घोड़े पर बैठे हो, तो इस भारी गट्ठर को अपने सिर पर क्यों उठा रखा है? इसे घोड़े की पीठ पर क्यों नहीं रख देते?”
उस आदमी ने बड़े ही भोलेपन से उत्तर दिया, “अरे हुजूर! मेरा घोड़ा बहुत कमजोर है। अगर मैं यह भारी गट्ठर भी उसके ऊपर रख दूंगा, तो वह मेरे और इस गट्ठर के बोझ से मर जाएगा। इसीलिए मैंने इसका वजन अपने सिर पर उठा रखा है ताकि मेरे प्यारे घोड़े को ज्यादा कष्ट न हो।”
यह सुनकर बीरबल अपनी हंसी नहीं रोक पाए। उन्हें समझ आ गया कि उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा मूर्ख मिल गया है। बीरबल ने उस आदमी को इनाम का लालच देकर अपने साथ दरबार चलने के लिए राजी कर लिया।
चालाक की खोज (The Search for the Clever One)
अब बीरबल को एक अत्यंत चालाक व्यक्ति की तलाश थी। इसके लिए वह शहर के मुख्य बाजार पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि एक व्यापारी और एक ग्राहक के बीच तीखी बहस हो रही थी।
मामला यह था कि ग्राहक ने व्यापारी से एक कीमती शॉल खरीदी थी। ग्राहक का दावा था कि उसने पैसे दे दिए हैं, जबकि व्यापारी का कहना था कि उसने पैसे नहीं लिए। दोनों के पास अपनी बात साबित करने का कोई गवाह नहीं था।
तभी वहां खड़े एक साधारण से दिखने वाले राहगीर ने हस्तक्षेप किया। उसने दोनों से कहा, “मैं इस समस्या का समाधान चुटकियों में कर सकता हूँ।”
उस व्यक्ति ने व्यापारी से कहा, “तुम अपनी तराजू लाओ।” फिर उसने ग्राहक से कहा, “तुम अपनी जेब में रखे सिक्के बाहर निकालो।”
जब ग्राहक ने अपनी जेब से सिक्के निकाले, तो उस चतुर व्यक्ति ने उन सिक्कों को पानी से भरे एक कटोरे में डाल दिया। पानी की सतह पर तेल की कुछ बूंदें तैरने लगीं।
चतुर व्यक्ति मुस्कुराया और बोला, “ये सिक्के इस व्यापारी के ही हैं। क्योंकि यह व्यापारी शॉल के साथ-साथ तेल का व्यवसाय भी करता है और दिनभर तेल छूने के कारण उसके हाथों का तेल इन सिक्कों पर लगा हुआ था। ग्राहक का सिर्फ कपड़ों का व्यापार है, उसके सिक्कों पर तेल नहीं होना चाहिए था।”
व्यापारी और वहां उपस्थित सभी लोग उस व्यक्ति की इस अद्भुत चतुराई को देखकर दंग रह गए। बीरबल ने तुरंत पहचान लिया कि यह व्यक्ति अत्यधिक चालाक और तीक्ष्ण बुद्धि का मालिक है। बीरबल ने उसे भी आदरपूर्वक दरबार में चलने का निमंत्रण दिया, जिसे उसने स्वीकार कर लिया।
अकबर के दरबार में न्याय और सीख
अगले दिन बीरबल दोनों व्यक्तियों को लेकर राजा अकबर के दरबार में हाजिर हुए। दरबार खचाखच भरा हुआ था। सभी यह देखने के लिए उत्सुक थे कि बीरबल किसे मूर्ख और किसे चालाक साबित करते हैं।
बीरबल ने सबसे पहले घोड़े वाले व्यक्ति को आगे किया और अकबर को पूरी कहानी सुनाई कि कैसे वह घोड़े पर बैठकर भी गट्ठर अपने सिर पर ढो रहा था ताकि घोड़े पर वजन न पड़े। अकबर और सभी दरबारी यह सुनकर ठहाके मारकर हंस पड़े। अकबर ने माना कि यह वाकई में एक महामूर्ख है।
इसके बाद बीरबल ने उस चतुर व्यक्ति को पेश किया और पानी में तेल वाले सिक्के की घटना सुनाई। बादशाह अकबर उस व्यक्ति की सूझबूझ और चालाकी से बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने दोनों को उचित इनाम देकर विदा किया।
अकबर ने मुस्कुराते हुए बीरबल से कहा, “बीरबल, तुमने अपनी बुद्धिमानी से एक बार फिर हमारा दिल जीत लिया। तुमने सचमुच एक परम मूर्ख और एक परम चालाक व्यक्ति को हमारे सामने पेश कर दिया।”
कहानी से सीख (Moral of the Story)
यह कहानी हमें सिखाती है कि मूर्खता और चालाकी इंसान के नजरिए और काम करने के तरीके से झलकती है। जहां बिना सोचे-समझे किया गया काम हमें हास्यास्पद (मूर्ख) बना देता है, वहीं थोड़ी सी समझदारी और तार्किक सोच (चालाकी/बुद्धिमानी) बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान पल भर में कर सकती है। हमें हमेशा अपने विवेक का सही इस्तेमाल करना चाहिए।
Discover more from StoryDunia
Subscribe to get the latest posts sent to your email.











