
महान मुगल सम्राट अकबर के दरबार में रोजाना नए-नए और पेचीदा मामले आते रहते थे। सम्राट अकबर अक्सर अपने मंत्रियों की परीक्षा लेने के लिए अजीबोगरीब सवाल और शर्तें रखते थे। लेकिन हर बार की तरह, उनके सबसे चतुर मंत्री बीरबल अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और हाजिरजवाबी से सभी समस्याओं का हल निकाल लेते थे। ऐसी ही एक बेहद दिलचस्प और शिक्षाप्रद कहानी है “हाथी की बिक्री” (Hathi Ki Bikri)।
भूमिका: सम्राट अकबर का अनोखा फैसला
एक समय की बात है, सम्राट अकबर के शाही अस्तबल में ‘मोती’ नाम का एक विशालकाय हाथी था। वह हाथी अब बूढ़ा हो चुका था और शाही सेना या किसी अन्य राजकीय कार्य के लिए उपयोगी नहीं रह गया था। लेकिन, शाही हाथी होने के कारण उसके खान-पान और रखरखाव पर शाही खजाने से बहुत भारी खर्च हो रहा था।
एक दिन, महाराज अकबर ने अपने मुख्य सलाहकार और मंत्रियों के साथ इस विषय पर चर्चा की। अकबर ने कहा, “यह हाथी अब बूढ़ा हो चुका है और इस पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। हमें इस हाथी को बेच देना चाहिए।”
सभी दरबारियों ने महाराज की इस बात का समर्थन किया। लेकिन सम्राट अकबर के मन में एक शरारत सूझी। उन्होंने कहा, “हम इस हाथी को सामान्य तरीके से नहीं बेचेंगे। हम इस हाथी को केवल उसी व्यक्ति को बेचेंगे जो इसकी कीमत ‘हाथी के वजन के बराबर सोने के सिक्कों’ में चुकाएगा।”
दरबारियों की चिंता और अजीब शर्त
महाराज की यह शर्त सुनकर पूरे दरबार में सन्नाटा पसर गया। उस जमाने में आज की तरह आधुनिक धर्मकांटे या बड़ी वजन तौलने वाली मशीनें नहीं हुआ करती थीं। किसी के पास भी ऐसा कोई साधन नहीं था जिससे इतने विशालकाय और भारी हाथी का सटीक वजन नापा जा सके।
सभी दरबारी आपस में कानाफूसी करने लगे, “इतने बड़े हाथी को कैसे तौला जा सकता है? यह तो पूरी तरह से असंभव कार्य है। और यदि कोई वजन नाप भी ले, तो हाथी के वजन के बराबर सोना कौन दे पाएगा?”
अकबर ने मुस्कुराते हुए अपनी नजरें बीरबल पर टिका दीं। उन्होंने पूछा, “क्यों बीरबल! क्या तुम्हारे पास इस समस्या का कोई समाधान है? क्या तुम इस हाथी का सटीक वजन करवाकर इसकी बिक्री करवा सकते हो?”
बीरबल ने हाथ जोड़कर विनम्रता से कहा, “जहाँपनाह! यह कार्य देखने में कठिन अवश्य लग रहा है, लेकिन असंभव नहीं है। मुझे केवल एक दिन का समय दीजिए, कल सुबह मैं नदी के किनारे इस हाथी का वजन सबके सामने तौलकर दिखाऊंगा और इसकी बिक्री भी सुनिश्चित कर दूंगा।”
नदी का किनारा और बीरबल की अनोखी युक्ति
अगले दिन सुबह, नदी के किनारे भारी भीड़ जमा हो गई। सम्राट अकबर, उनके मंत्रीगण और राज्य के कई अमीर व्यापारी भी वहां पहुंचे। सभी यह देखने के लिए उत्सुक थे कि बिना किसी बड़ी मशीन के बीरबल इस भीमकाय हाथी का वजन कैसे करेंगे।
बीरबल ने वहां एक बहुत बड़ी खाली नाव मंगवाई। उन्होंने मल्लाहों की मदद से उस नाव को नदी के किनारे पानी में स्थिर खड़ा करवाया।
इसके बाद, बीरबल ने महावत को आदेश दिया कि वह हाथी ‘मोती’ को धीरे-धीरे उस नाव पर चढ़ाए। जैसे ही हाथी नाव पर सवार हुआ, हाथी के भारी वजन के कारण नाव पानी में काफी नीचे तक धंस गई।
बीरबल ने तुरंत एक रंगीन चाक उठाई और नाव के उस हिस्से पर पानी की सतह के समानांतर एक गहरा निशान लगा दिया, जहां तक नाव पानी में डूबी थी। यह देखकर वहां खड़े लोग हैरान थे कि आखिर बीरबल करना क्या चाहते हैं।
असंभव कार्य को बनाया संभव
इसके बाद, बीरबल ने हाथी को सुरक्षित रूप से नाव से नीचे उतारने का निर्देश दिया। हाथी के उतरते ही नाव वापस पानी के ऊपर आ गई।
अब बीरबल ने वहां उपस्थित अमीर व्यापारियों और सम्राट से कहा, “जहाँपनाह! अब हमारे पास हाथी के वजन का सटीक माप आ चुका है। जो भी व्यापारी इस हाथी को खरीदना चाहता है, वह अपने सोने के सिक्के इस खाली नाव में डालना शुरू करे।”
व्यापारियों ने एक-एक करके सोने की बोरियां नाव में रखनी शुरू कर दीं। जैसे-जैसे नाव में सोने के सिक्के और बोरियां रखी जा रही थीं, नाव धीरे-धीरे पानी में नीचे बैठने लगी। बीरबल लगातार पानी की सतह और नाव पर लगे उस निशान को देख रहे थे।
जैसे ही सोने के वजन से नाव ठीक उसी निशान तक डूब गई, जो निशान हाथी के खड़े होने पर बना था, बीरबल ने तुरंत चिल्लाकर कहा, “बस! रुक जाइए। इस समय नाव में जितना सोना है, उसका वजन इस हाथी के वजन के बिल्कुल बराबर है।”
सम्राट अकबर और वहां उपस्थित सभी लोग बीरबल की इस वैज्ञानिक और अद्भुत युक्ति को देखकर दंग रह गए। बीरबल ने बिना किसी तराजू के आर्किमिडीज के सिद्धांत (Displacement Principle) का उपयोग करते हुए हाथी का सटीक वजन सोने में तौल दिया था।
कहानी से सीख (Moral of the Story)
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन या असंभव क्यों न लगे, यदि हम शांत दिमाग और सूझबूझ से काम लें, तो हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। बुद्धि और ज्ञान के बल पर दुनिया की बड़ी से बड़ी चुनौती को भी आसानी से पार किया जा सकता है।
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