
सावन का महीना और रिमझिम बरसती बूंदें हमेशा से ही इंसानी दिलों में एक अजीब सी हलचल पैदा कर देती हैं। बारिश की हर एक बूंद अपने साथ पुरानी यादें और आने वाले कल के हसीन सपने लेकर आती है। उस दिन भी मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही था। आसमान में गहरे सलेटी रंग के बादलों ने डेरा डाल रखा था और ठंडी, नम हवाएं मानो कानों में कोई पुराना रोमांटिक नगमा गुनगुना रही थीं।
आरव अपने दफ्तर की बड़ी सी कांच की खिड़की के पास खड़ा होकर बाहर का नजारा देख रहा था। उसे बारिश से बेहद लगाव था, लेकिन आज वह थोड़ा चिंतित था। वजह यह थी कि आज सुबह जल्दबाजी में वह अपनी छतरी घर पर ही भूल आया था। अब शाम के छह बज चुके थे, दफ्तर की छुट्टी हो गई थी और बाहर मूसलाधार बारिश शुरू हो चुकी थी। सड़कों पर पानी बहने लगा था और लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे।
एक अनपेक्षित मुलाकात और वह चमकीला रंग
आखिरकार आरव ने हिम्मत जुटाई और अपनी जरूरी फाइलों को चमड़े के बैग में सुरक्षित रखकर दफ्तर की इमारत से बाहर कदम रखा। उसने अपने बैग को सिर पर रखा और सड़क के पार बने बस स्टॉप की तरफ दौड़ लगा दी। ठंडी बूंदें जैसे ही उसके बदन को छूतीं, उसके भीतर एक सिहरन पैदा कर देती। वह भागकर एक पुराने बुकस्टोर के छज्जे के नीचे खड़ा हो गया।
आरव पूरी तरह से भीग चुका था। वह अपने गीले बालों को झटकते हुए अपने कपड़ों को सुखाने की कोशिश कर ही रहा था कि तभी ग्रे और काले रंग के इस उदास, धुंधले मौसम में एक बेहद खूबसूरत रंग बिखरा। वह रंग था—चमकीला गुलाबी।
आरव की नजरें सड़क के उस पार से आती हुई एक गुलाबी छतरी पर थम गईं। उस सुंदर गुलाबी छतरी को थामे हुए एक लड़की बेहद शांत और सधे हुए कदमों से बुकस्टोर की तरफ ही बढ़ रही थी। उसके चेहरे पर एक सादगी भरी मुस्कान थी। वह बारिश से डर नहीं रही थी, बल्कि ऐसा लग रहा था कि वह बारिश की हर बूंद का दिल से स्वागत कर रही हो।
गुलाबी छतरी के नीचे दो दिल
जैसे ही वह लड़की बुकस्टोर के करीब पहुंची, उसकी नजर ठंड से ठिठुरते और खुद को सिकोड़े हुए आरव पर पड़ी। आरव पूरी तरह भीग चुका था और ठंड से कांप रहा था। लड़की कुछ पल के लिए ठिठकी, फिर उसने मुस्कुराते हुए अपनी गुलाबी छतरी को आरव की तरफ बढ़ा दिया।
“क्या मैं आपकी कुछ मदद कर सकती हूँ?” उसकी सुरीली आवाज बारिश के शोर में भी आरव को साफ सुनाई दी।
आरव ने चौंककर सामने देखा। उसकी आंखें उस लड़की के चेहरे पर ठहर गईं। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें और सादगी भरा चेहरा आरव के दिल को छू गया। आरव ने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा, “जी… दरअसल मैं अपनी छतरी घर पर भूल गया हूँ और मुझे बस स्टॉप तक जाना है। लेकिन आप…”
लड़की ने खिलखिलाकर हंसते हुए कहा, “तो फिर देर किस बात की? इस गुलाबी छतरी का दायरा इतना बड़ा है कि हम दोनों इसमें आसानी से आ सकते हैं। आइए, सफर को थोड़ा आसान बनाते हैं।”
आरव मना नहीं कर पाया। वह उस चमकीली गुलाबी छतरी के नीचे आ गया। अब दोनों के बीच की दूरी सिमट चुकी थी। छतरी छोटी थी, जिसके कारण दोनों के कंधे एक-दूसरे से छू रहे थे। बाहर दुनिया पानी में भीग रही थी, लेकिन उस छोटी सी गुलाबी छतरी के नीचे एक अनूठी गर्माहट और सुकून का अहसास था।
बातों का सिलसिला और अनकहा अहसास
दोनों ने धीरे-धीरे आगे बढ़ना शुरू किया। बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। आरव ने अपना परिचय दिया और जाना कि उस लड़की का नाम मीरा था। मीरा एक कॉलेज स्टूडेंट थी और उसे पुरानी किताबें पढ़ना और बारिश में घूमना बेहद पसंद था।
“तुम्हारी यह गुलाबी छतरी बहुत प्यारी है,” आरव ने कहा।
मीरा ने छतरी की तरफ देखा और उसकी आंखों में एक चमक आ गई। “यह छतरी मेरी दादी ने मुझे दी थी। जब भी मैं इसे लेकर बाहर निकलती हूँ, मुझे ऐसा लगता है कि वह मेरे साथ हैं और मुझे हर मुश्किल से बचा रही हैं।”
रास्ते की दूरी धीरे-धीरे कम हो रही थी, लेकिन आरव के दिल की धड़कनें तेज हो रही थीं। उसे लग रहा था कि काश यह रास्ता कभी खत्म न हो। हवा का एक तेज झोंका आया और बारिश की बौछार उन दोनों पर पड़ी। आरव ने सहजता से मीरा को अपनी तरफ खींचा ताकि वह भीग न जाए। उस पल दोनों की नजरें मिलीं और वक्त जैसे वहीं थम गया। शब्दों की जगह अब खामोशी बात कर रही थी।
एक नई शुरुआत की उम्मीद
आखिरकार बस स्टॉप आ ही गया। आरव की बस सामने खड़ी थी। दोनों छतरी के नीचे से बाहर आए। अब जुदा होने का वक्त था, लेकिन दोनों में से कोई भी आगे कदम नहीं बढ़ा पा रहा था।
आरव ने हिम्मत जुटाई और मीरा की तरफ देखा। “मीरा, इस बारिश और तुम्हारी इस गुलाबी छतरी को मैं जिंदगी भर नहीं भूल पाऊंगा। क्या हम… क्या हम दोबारा मिल सकते हैं?”
मीरा ने शरमाते हुए अपनी पलकें झुका लीं। उसने अपने बैग से एक छोटा सा कागज का टुकड़ा निकाला, उस पर अपना फोन नंबर लिखा और आरव के हाथ में थमा दिया।
“सिर्फ तभी, जब अगली बारिश में तुम अपनी छतरी फिर से घर पर भूल जाओ,” मीरा ने शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा।
आरव के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान तैर गई। वह बस में चढ़ गया और खिड़की से बाहर देखने लगा। मीरा अपनी गुलाबी छतरी के साथ भीड़ में ओझल हो रही थी, लेकिन आरव के दिल में एक ऐसी कहानी की शुरुआत हो चुकी थी, जो इस जन्म में कभी खत्म नहीं होने वाली थी। वह गुलाबी छतरी अब सिर्फ एक छतरी नहीं, बल्कि दो अजनबी दिलों को जोड़ने वाला एक बेहद खूबसूरत जरिया बन चुकी थी।
Discover more from StoryDunia
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
