तिरस्कृत प्रेमी (Triskrit Premi): एक अधूरी मोहब्बत और आत्मसम्मान की कहानी

पढ़ें 'तिरस्कृत प्रेमी' की एक बेहद भावुक और प्रेरक कहानी। कैसे एक प्रेमी ने अपने तिरस्कार और टूटे दिल को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।

Triskrit Premi

प्यार एक ऐसा अहसास है जो इंसान को या तो फना कर देता है या फिर उसे एक नया जीवन देता है। ‘तिरस्कृत प्रेमी’ की यह कहानी देव और रिया की है, जो हमें सिखाती है कि कभी-कभी जीवन में मिलने वाला सबसे बड़ा रिजेक्शन ही हमारी सबसे बड़ी सफलता का कारण बनता है।

बेपनाह मोहब्बत का अहसास

देव एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाला लड़का था। वह स्वभाव से शांत, गंभीर और अपनी पढ़ाई में व्यस्त रहने वाला छात्र था। लेकिन जब उसके जीवन में रिया ने कदम रखा, तो उसकी पूरी दुनिया ही बदल गई। रिया कॉलेज की सबसे खूबसूरत और अमीर लड़कियों में से एक थी। वह जितनी सुंदर थी, उतनी ही अभिमानी भी थी।

देव को रिया से पहली नजर में ही प्यार हो गया था। देव के लिए रिया सिर्फ एक लड़की नहीं, बल्कि उसकी पूरी कायनात बन चुकी थी। वह रिया की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखता था। कॉलेज के नोट्स बनाने से लेकर रिया के असाइनमेंट पूरे करने तक, देव हमेशा उसके एक इशारे पर खड़ा रहता था। लेकिन रिया के लिए देव केवल एक जरिया था, जिससे वह अपना काम निकलवाती थी। वह अक्सर अपने सहेलियों के सामने देव के सीधेपन का मजाक उड़ाया करती थी, लेकिन देव इन सब बातों से बेखबर उसकी मोहब्बत में खोया रहता था।

वह भयानक शाम और सार्वजनिक अपमान

समय बीतता गया और कॉलेज का आखिरी साल आ गया। देव ने तय किया कि वह अब अपने दिल की बात रिया से कह कर रहेगा। उसने सोचा कि उसकी निस्वार्थ सेवा और सच्ची मोहब्बत को देखकर रिया का दिल जरूर पिघल जाएगा। कॉलेज के विदाई समारोह (Farewell Party) के दिन, देव ने हिम्मत जुटाई। उसने एक सुंदर लाल गुलाब खरीदा और अपनी भावनाओं को एक पत्र में पिरोया।

पार्टी के बीच में, जब सब लोग मौज-मस्ती कर रहे थे, देव रिया के पास गया। उसने घुटनों के बल बैठकर, सबके सामने गुलाब का फूल रिया की तरफ बढ़ाया और कांपती आवाज में कहा, “रिया, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। क्या तुम मेरी जीवनसंगिनी बनोगी?”

वहाँ मौजूद सभी छात्र शांत हो गए। रिया ने देव की तरफ देखा, उसके चेहरे पर प्यार या सहानुभूति का कोई भाव नहीं था, बल्कि वहाँ केवल घृणा और गुस्सा था। उसने देव के हाथ से गुलाब छीना और उसे जमीन पर फेंक कर अपने सैंडल से कुचल दिया।

रिया ने चिल्लाकर कहा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझसे यह कहने की? अपनी शक्ल देखी है आईने में? एक मामूली और गरीब लड़के की इतनी औकात कि वह मेरे जैसी अमीर लड़की को प्रपोज करे? तुम मेरे जूतों के लायक भी नहीं हो। आज के बाद अपनी गंदी शक्ल मुझे मत दिखाना।”

पूरे कॉलेज के सामने देव का यह भयानक तिरस्कार उसकी आत्मा को छलनी कर गया। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, और चारों तरफ से आ रही हंसने की आवाजें उसके कानों में गूंज रही थीं। देव वहाँ से भाग गया।

दर्द से सफलता का सफर

उस रात देव ने आत्महत्या करने का भी सोचा, लेकिन जब उसने अपने बूढ़े माता-पिता का चेहरा याद किया, तो उसने अपना इरादा बदल दिया। उसने फैसला किया कि वह इस दर्द में खुद को मिटाएगा नहीं, बल्कि इसे अपनी ताकत बनाएगा। उसने अपनी डायरी में लिखा—”तिरस्कार मेरी ताकत बनेगा।”

देव ने शहर छोड़ दिया और दिल्ली चला गया। उसने अपनी पढ़ाई और करियर पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। उसने रातों की नींद और दिन का चैन भूलकर मेहनत की। देव के अंदर की आग ने उसे कभी रुकने नहीं दिया। अगले पांच वर्षों में, देव ने अपनी खुद की सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू की। उसकी मेहनत रंग लाई और उसकी कंपनी देश की अग्रणी स्टार्टअप्स में शुमार हो गई। वह अब एक सफल, अमीर और सम्मानित उद्यमी (Entrepreneur) बन चुका था। इसके साथ ही, उसने अपने दिल के दर्द को कविता और कहानियों का रूप दिया। उसका लिखा हुआ उपन्यास ‘तिरस्कृत प्रेमी’ देश का बेस्टसेलर बन गया।

वक्त का पहिया और अंतिम मुलाकात

सालों बाद, मुंबई के एक पांच सितारा होटल में एक बड़ी बिजनेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ था। देव वहाँ मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित था। व्याख्यान समाप्त होने के बाद, जब देव लोगों से मिल रहा था, तभी उसकी नजर एक महिला पर पड़ी जो बेहद कमजोर और उदास दिख रही थी। वह रिया थी।

रिया की जिंदगी वैसी नहीं रही थी जैसी उसने सोची थी। उसके पिता का बिजनेस डूब चुका था, और जिस अमीर लड़के से उसने शादी की थी, उसने उसे धोखा दे दिया था। आज वह एक साधारण नौकरी के लिए भटक रही थी।

जब रिया ने देव को देखा—वही देव जिसे उसने कभी लात मार दी थी, जो आज सफलता के शिखर पर था—तो उसकी आँखों में शर्मिंदगी के आँसू आ गए। वह धीरे से देव के पास आई और बोली, “देव… क्या तुम मुझे पहचानते हो?”

देव ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ रिया, मैं तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ। तुम कैसी हो?”

रिया रो पड़ी और बोली, “मुझे माफ कर दो देव। मैंने तुम्हारे साथ बहुत बुरा किया। मैंने तुम्हारी सच्ची मोहब्बत का तिरस्कार किया और पैसों के पीछे भागी। आज मेरे पास कुछ नहीं है।”

देव ने बड़ी शालीनता से रिया के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “रिया, मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है। वास्तव में, मुझे तुम्हारा धन्यवाद करना चाहिए। अगर उस दिन तुमने मेरा तिरस्कार न किया होता, तो आज मैं इस मुकाम पर कभी नहीं पहुँच पाता। तुम्हारी ‘ना’ ने मुझे खुद को साबित करने की ताकत दी। तुमने मुझे सिखाया कि आत्मसम्मान क्या होता है।”

रिया अवाक खड़ी रह गई। देव ने उसे अपनी कंपनी में एक अच्छे पद पर नौकरी का प्रस्ताव दिया और सम्मान के साथ आगे बढ़ गया। वह अब एक तिरस्कृत प्रेमी नहीं, बल्कि अपनी किस्मत का खुद निर्माता बन चुका था।


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