
कॉलेज के गलियारे हमेशा से ही कुछ अनकही कहानियों, दबी हुई मुस्कुराहटों और धड़कते हुए दिलों के गवाह रहे हैं। यह कहानी भी एक ऐसे ही दौर की है, जब जिंदगी में पहली बार ‘प्यार’ शब्द के सही मायने समझ में आए थे। जब दिल ने पहली बार किसी अजनबी के लिए इस कदर धड़कना सीखा कि अपनी ही धड़कनों पर काबू नहीं रहा। यह कहानी है अनुज और नैना की, और उनके उस पहले अफेयर की, जिसने उनकी पूरी दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया।
कॉलेज का वो पहला दिन और नैना की दस्तक
अनुज एक शांत और किताबों में खोया रहने वाला लड़का था। उसके लिए कॉलेज का मतलब सिर्फ लेक्चर्स, असाइनमेंट्स और लाइब्रेरी था। लेकिन जिंदगी हमेशा हमारी प्लानिंग के हिसाब से नहीं चलती। कॉलेज के दूसरे साल की एक सुबह, जब बारिश की हल्की फुहारें गिर रही थीं, अनुज क्लासरूम की खिड़की के पास बैठा था। तभी क्लास में नैना ने कदम रखा।
हल्के नीले रंग के सूट में, बिखरे हुए बालों को संभालती हुई नैना जब क्लास के अंदर आई, तो मानो हवाओं में एक अलग सी खुशबू घुल गई। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी और चेहरे पर एक मासूम सी मुस्कान। अनुज ने जैसे ही उसे देखा, उसकी नजरें वहीं ठहर गईं। दिल की धड़कन अचानक से तेज हो गई। यह वही पल था जिसे लोग अक्सर ‘पहली नजर का प्यार’ कहते हैं। लेकिन अनुज के लिए यह केवल आकर्षण नहीं, बल्कि दिल के किसी कोने में दबी हुई हलचल थी।
ख़ामोशियाँ जो बहुत कुछ कह जाती थीं
धीरे-धीरे दिन बीतते गए। अनुज और नैना एक ही बैच में थे, इसलिए अक्सर उनका आमना-सामना हो जाता था। अनुज बेहद शर्मीला था, वह कभी हिम्मत नहीं जुटा पाता था कि नैना से जाकर बात कर सके। लेकिन वह उसकी हर छोटी-बड़ी बात पर नजर रखता था। नैना का हंसना, उसका सहेलियों के साथ कॉरिडोर में घूमना, और कभी-कभी पढ़ते हुए अपनी उंगली से बालों को कान के पीछे करना—अनुज के लिए यह सब देखना एक रूटीन बन गया था।
कहते हैं कि जब आप किसी को सच्चे दिल से चाहते हैं, तो कायनात भी आपको उससे मिलाने की साजिश रचने लगती है। एक दिन लाइब्रेरी में अनुज अपनी मनपसंद किताब ढूंढ रहा था। तभी उसकी नजर उसी किताब पर पड़ी जिसे वह ढूंढ रहा था, लेकिन जैसे ही उसने किताब उठाने के लिए हाथ बढ़ाया, एक दूसरा हाथ भी उसी किताब पर पड़ा। वह हाथ नैना का था।
दोनों की नजरें मिलीं। कुछ सेकंड के लिए वक्त जैसे ठहर सा गया। नैना ने मुस्कुराते हुए कहा, “ओह! सॉरी, क्या तुम्हें यह किताब चाहिए?”
अनुज ने हड़बड़ाते हुए कहा, “न… नहीं, तुम ले सकती हो।”
नैना मुस्कुराई और बोली, “थैंक यू! वैसे मैं नैना हूँ।”
अनुज ने राहत की सांस लेते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया, “मैं अनुज।”
बारिश, एक छतरी और धड़कता हुआ दिल
उस मुलाकात के बाद दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया। नोट्स शेयर करने से शुरू हुई यह दोस्ती धीरे-धीरे गहरी होने लगी। अब वे कॉलेज कैंटीन में साथ बैठते, पढ़ाई के बहाने घंटों बातें करते और एक-दूसरे के सुख-दुख साझा करने लगे। अनुज को महसूस होने लगा था कि नैना सिर्फ उसकी दोस्त नहीं, बल्कि उससे कहीं बढ़कर बन चुकी थी।
एक शाम, जब कॉलेज खत्म हुआ, तो अचानक मूसलाधार बारिश होने लगी। बाकी छात्र यहाँ-वहाँ छिपने लगे। नैना के पास छतरी नहीं थी और वह परेशान खड़ी थी। अनुज के पास एक छोटी सी छतरी थी। उसने हिम्मत जुटाई और नैना के पास जाकर कहा, “अगर तुम्हें एतराज न हो, तो हम यह छतरी शेयर कर सकते हैं?”
नैना ने मुस्कुराकर हामी भर दी। उस तंग छतरी के नीचे, दोनों बिल्कुल करीब चल रहे थे। बारिश की बूंदें उनके कंधों को भिगो रही थीं, लेकिन अनुज के दिल में एक अलग ही गर्मी महसूस हो रही थी। नैना की सांसों की खुशबू और उसकी नजदीकी ने अनुज के दिल की धड़कनों को इस कदर बढ़ा दिया कि उसे डर था कहीं नैना उसकी धड़कनें सुन न ले। उस पल अनुज को अहसास हुआ कि यह उसका ‘पहला अफेयर’ है, जो बिना किसी वादे के उसके दिल में शुरू हो चुका था।
इज़हार-ए-मोहब्बत: जब पहला अफेयर मुकम्मल हुआ
कॉलेज का आखिरी साल करीब आ रहा था और अनुज के दिल का डर भी बढ़ रहा था। उसे डर था कि कहीं कॉलेज खत्म होने के बाद वह नैना को हमेशा के लिए खो न दे। दोस्तों के समझाने पर उसने फैसला किया कि वह अपने दिल की बात नैना को बता देगा।
एक दिन, कॉलेज के उसी पुराने बरगद के पेड़ के नीचे, जहाँ वे अक्सर बैठा करते थे, अनुज ने नैना को बुलाया। नैना आई और उसने अनुज के चेहरे पर एक अजीब सी घबराहट देखी। उसने पूछा, “क्या बात है अनुज? तुम इतने परेशान क्यों लग रहे हो?”
अनुज ने गहरी सांस ली, अपनी जेब से एक छोटा सा लाल गुलाब निकाला और नैना के हाथों में देते हुए कहा, “नैना, मैं शब्दों को घुमाना नहीं जानता। बस इतना जानता हूँ कि जब से तुम मेरी जिंदगी में आई हो, मेरी दुनिया बदल गई है। मैं अपनी हर सुबह तुम्हारी मुस्कान के साथ शुरू करना चाहता हूँ और हर शाम तुम्हारी बातों के साथ खत्म करना चाहता हूँ। मुझे तुमसे प्यार हो गया है। क्या तुम मेरी जिंदगी का हिस्सा बनोगी?”
नैना बिल्कुल खामोश हो गई। उसकी खामोशी देखकर अनुज का दिल बैठने लगा। लेकिन अगले ही पल, नैना की आँखों में आंसू आ गए और उसने मुस्कुराते हुए अनुज को गले लगा लिया। उसने धीरे से कहा, “तुमने यह कहने में इतनी देर क्यों कर दी, बुद्धू? मैं भी कब से इस पल का इंतजार कर रही थी।”
वह पल उनके जीवन का सबसे खूबसूरत पल था। उनका पहला अफेयर, जो खामोशियों से शुरू हुआ था, अब एक खूबसूरत रिश्ते का रूप ले चुका था। प्यार का यह पहला अहसास हमेशा-हमेशा के लिए उनके दिलों में दर्ज हो गया।
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