
मुगल सम्राट अकबर के दरबार में बीरबल का मान-सम्मान और उनकी लोकप्रियता चरम पर थी। अपनी कुशाग्र बुद्धि, हाजिरजवाबी और न्यायप्रियता के कारण बीरबल बादशाह अकबर के सबसे प्रिय सलाहकार थे। बीरबल की इसी लोकप्रियता और बादशाह के साथ उनकी निकटता से दरबार के अन्य दरबारी मन ही मन बेहद जलते थे। वे हमेशा इस ताक में रहते थे कि कब कोई ऐसा अवसर मिले जिससे वे बीरबल को नीचा दिखा सकें या उनसे बदला ले सकें।
बीरबल से ईर्ष्या और बदले की साज़िश
अकबर के दरबार में मानसिंह नाम का एक दरबारी था, जो बीरबल की बुद्धिमानी से सबसे ज्यादा चिढ़ता था। एक बार किसी मामले में बीरबल ने मानसिंह की गलती को सबके सामने उजागर कर दिया था, जिससे मानसिंह को बहुत अपमानित होना पड़ा था। तभी से मानसिंह के मन में बदले की आग सुलग रही थी। वह किसी भी कीमत पर बीरबल से बदला लेना चाहता था।
मानसिंह ने बीरबल को अपने रास्ते से हटाने के लिए एक बेहद खतरनाक योजना बनाई। इस योजना में उसने बादशाह अकबर के खास नाई को भी शामिल कर लिया। नाई प्रतिदिन अकबर की हजामत बनाने और मालिश करने के लिए महल में आता था। मानसिंह ने नाई को बहुत सारे सोने के सिक्के देने का लालच दिया और उसे अपनी साज़िश का हिस्सा बना लिया।
नाई की अजीब मांग और अकबर की उलझन
योजना के अनुसार, एक सुबह जब नाई अकबर की दाढ़ी बना रहा था, तो उसने बड़े ही चालाकी भरे लहजे में कहा, “जहाँपनाह! आज रात मेरे सपने में आपके स्वर्गीय पूज्य पिताजी आए थे। वे स्वर्ग में बहुत सुखी हैं, लेकिन…”
अकबर चौंक गए और उत्सुकता से पूछा, “लेकिन क्या? क्या उन्हें स्वर्ग में कोई कष्ट है?”
नाई ने उदास चेहरा बनाते हुए कहा, “जहाँपनाह, उन्होंने कहा कि स्वर्ग में हर प्रकार की सुख-सुविधाएं हैं, लेकिन वहाँ मनोरंजन और बुद्धिमत्तापूर्ण बातें करने के लिए कोई चतुर व्यक्ति नहीं है। इसलिए वे बहुत अकेले और उदास रहते हैं। उन्होंने संदेश भेजा है कि यदि आप पृथ्वी से अपने सबसे बुद्धिमान दरबारी को कुछ समय के लिए स्वर्ग भेज सकें, तो उनका मन बहल जाएगा।”
अकबर अपने पिता से बेहद प्यार करते थे। वे असमंजस में पड़ गए कि जीवित व्यक्ति को स्वर्ग कैसे भेजा जाए। उन्होंने नाई से पूछा, “लेकिन यह कैसे संभव है?”
नाई ने तुरंत जवाब दिया, “जहाँपनाह! यह बहुत आसान है। हम उस व्यक्ति को श्मशान घाट पर एक ऊंचे मंच पर बैठाएंगे और चारों ओर से अग्नि प्रज्वलित कर देंगे। मंत्रोच्चारण के साथ वह सीधे स्वर्ग में आपके पिता के पास पहुँच जाएगा। और मेरी नजर में इस कार्य के लिए बीरबल से श्रेष्ठ और बुद्धिमान कोई दूसरा व्यक्ति हो ही नहीं सकता।”
बीरबल की अनूठी योजना
बादशाह अकबर ने बीरबल को दरबार में बुलाया और नाई द्वारा कही गई बात बताई। अकबर ने कहा, “बीरबल, हमारे पिता की आत्मा की शांति और उनके मनोरंजन के लिए तुम्हें स्वर्ग जाना होगा।”
बीरबल तुरंत समझ गए कि यह उनके दुश्मनों की कोई गहरी साज़िश है। उन्होंने चेहरे पर कोई शिकन न लाते हुए कहा, “जहाँपनाह, यह तो मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है कि मुझे आपके पूज्य पिताजी की सेवा करने का अवसर मिल रहा है। लेकिन मुझे स्वर्ग की लंबी यात्रा की तैयारी करने के लिए कम से कम एक महीने का समय चाहिए। साथ ही, मैं चाहता हूँ कि स्वर्ग जाने की प्रक्रिया मेरे अपने घर के पास वाले मैदान में ही संपन्न की जाए।”
अकबर ने बीरबल की यह मांग सहर्ष स्वीकार कर ली। घर लौटकर बीरबल ने तुरंत काम शुरू कर दिया। उन्होंने उस निश्चित स्थान पर, जहाँ उन्हें अग्नि के हवाले किया जाना था, वहाँ से अपने घर के भीतर तक एक गुप्त भूमिगत सुरंग खुदवा ली। सुरंग का रास्ता इस तरह बनाया गया था कि ऊपर से देखने पर किसी को शक न हो।
स्वर्ग की यात्रा का नाटक
एक महीने बाद, तय तिथि पर बीरबल को उसी स्थान पर ले जाया गया। मानसिंह और नाई मन ही मन बेहद खुश हो रहे थे कि आज बीरबल का अंत निश्चित है। बीरबल को घास-फूस और लकड़ियों के ढेर के बीच बैठाया गया और उसमें आग लगा दी गई।
जैसे ही चारों ओर धुआँ फैला, बीरबल बड़ी ही चालाकी से गुप्त सुरंग के रास्ते खिसक कर अपने घर सुरक्षित पहुँच गए। बाहर खड़े दरबारी और मानसिंह खुशी से झूम रहे थे कि उनका कांटा हमेशा के लिए निकल गया।
बीरबल अगले छह महीनों तक अपने घर में ही छिपे रहे। इस दौरान उन्होंने अपनी दाढ़ी और सिर के बालों को खूब लंबा होने दिया। वे पूरी तरह से सन्यासी जैसे दिखने लगे थे।
बीरबल की दरबार में वापसी और न्याय
छह महीने बाद, एक दिन अचानक बीरबल दरबार में हाजिर हो गए। बीरबल को जीवित और इस रूप में देखकर मानसिंह के पैरों तले जमीन खिसक गई। नाई डर के मारे कांपने लगा।
अकबर अपनी गद्दी से खड़े हो गए और खुशी से बीरबल को गले लगा लिया। अकबर ने पूछा, “बीरबल! तुम वापस आ गए? हमारे पिताजी कैसे हैं? और तुम्हारा यह रूप कैसा है?”
बीरबल ने हाथ जोड़कर कहा, “जहाँपनाह! आपके पिताजी स्वर्ग में अत्यंत ठाठ-बाट से रह रहे हैं। वे आपकी इस भेंट से बहुत प्रसन्न हुए। लेकिन स्वर्ग में एक बहुत बड़ी समस्या है। वहाँ कोई नाई नहीं है, जिसके कारण आपके पिताजी और अन्य पूर्वजों के बाल और दाढ़ी मेरी तरह ही बहुत बड़े-बड़े हो चुके हैं। वे वहां बहुत असुविधा महसूस कर रहे हैं।”
बीरबल ने आगे कहा, “इसलिए, आपके पिताजी ने तुरंत अपने इस चतुर नाई को स्वर्ग भेजने की मांग की है ताकि वे अपनी दाढ़ी और बाल कटवा सकें। हमें बिना किसी देरी के इस नाई को तुरंत स्वर्ग भेज देना चाहिए।”
अकबर ने तुरंत सैनिकों को आदेश दिया कि नाई को स्वर्ग भेजने की तैयारी की जाए। यह सुनते ही नाई अकबर के पैरों में गिर पड़ा और रोने लगा। उसने थरथराते हुए स्वीकार किया, “जहाँपनाह! मुझे क्षमा करें। यह सब बीरबल जी से बदला लेने के लिए दरबारी मानसिंह की रची गई एक साज़िश थी। स्वर्ग में कोई नहीं है। मुझे लालच दिया गया था।”
अकबर का क्रोध सातवें आसमान पर पहुँच गया। उन्होंने तुरंत मानसिंह और नाई को बंदी बनाने और उन्हें आजीवन कारावास की सजा देने का हुक्म सुनाया।
सीख: बदले का परिणाम हमेशा बुरा होता है
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि दूसरों का बुरा चाहने वाले और बदले की भावना से काम करने वाले लोगों का अंत हमेशा बुरा ही होता है। दूसरों के लिए खोदा गया गड्ढा अंततः स्वयं के विनाश का कारण बनता है। बुद्धिमत्ता और सच्चाई की हमेशा जीत होती है।
Discover more from StoryDunia
Subscribe to get the latest posts sent to your email.











