
मुगल बादशाह अकबर के दरबार में नौ रत्न थे, जिनमें से बीरबल उनके सबसे प्रिय और बुद्धिमान मंत्री थे। बीरबल की तीव्र बुद्धि, हाजिरजवाबी और न्यायप्रियता के कारण बादशाह अकबर उन पर बेहद भरोसा करते थे। लेकिन बीरबल की यही लोकप्रियता दरबार के अन्य मंत्रियों और दरबारियों की आँखों में खटकती थी। वे हमेशा बीरबल को नीचा दिखाने और उन्हें बादशाह की नजरों में गिराने के नए-नए षड्यंत्र रचते रहते थे। ऐसा ही एक प्रसिद्ध किस्सा है “बीरबल की स्वर्ग यात्रा” का, जिसमें विरोधियों ने बीरबल को जान से मारने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन बीरबल ने अपनी चतुराई से न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि दुश्मनों को भी बेनकाब कर दिया।
षड्यंत्र की शुरुआत Akbar Birbal Ki Kahani
दरबार में एक नाई था, जो बीरबल से बहुत जलता था। वह दरबार के अन्य ईर्ष्यालु मंत्रियों के साथ मिलकर बीरबल को रास्ते से हटाने की योजना बनाने लगा। एक दिन, नाई को अपनी चाल चलने का मौका मिल गया। जब वह बादशाह अकबर के बाल काट रहा था और उनकी दाढ़ी बना रहा था, तो उसने बातों-बातों में कहा, “जहाँपनाह! कल रात मेरे सपने में आपके स्वर्गीय पूज्य पिताजी आए थे।”
अकबर चौंक गए और उत्सुकता से पूछा, “अच्छा! उन्होंने तुमसे क्या कहा? क्या वे स्वर्ग में सकुशल और प्रसन्न हैं?”
नाई ने बेहद गंभीर चेहरा बनाकर कहा, “हाँ जहाँपनाह, वे वहां बहुत खुश हैं। लेकिन उन्होंने मुझसे कहा कि स्वर्ग में सब कुछ है, बस वहां कोई ऐसा बुद्धिमान व्यक्ति नहीं है जिससे वे बातें कर सकें और अपना मनोरंजन कर सकें। उन्होंने कहा कि उन्हें वहां अकेलापन महसूस होता है। इसलिए वे चाहते हैं कि आप अपने दरबार से सबसे बुद्धिमान व्यक्ति को उनके पास स्वर्ग भेजें।”
अकबर ने इस बात पर गंभीरता से विचार किया और पूछा, “लेकिन हमारे दरबार में सबसे बुद्धिमान तो बीरबल ही हैं। पर किसी जीवित व्यक्ति को स्वर्ग कैसे भेजा जा सकता है?”
नाई ने तुरंत अपनी तैयार की गई योजना बताई, “जहाँपनाह, इसका एक पारंपरिक तरीका है। हमें बीरबल जी को एक सजे-धजे चिता पर बैठाना होगा और फिर उसमें आग लगानी होगी। हमारे पुरोहितों के मंत्रोच्चार और उस पवित्र अग्नि के माध्यम से बीरबल जी सीधे स्वर्ग में आपके पिताजी के पास पहुँच जाएंगे।”
बीरबल के लिए बिछाया गया जाल Akbar Birbal Kahani
अकबर अपने पिता से बहुत प्यार करते थे, इसलिए वे नाई की इस मूर्खतापूर्ण और चालाकी भरी बात में आ गए। अगले दिन दरबार में अकबर ने बीरबल को बुलाया और कहा, “बीरबल, हमारे पिता स्वर्ग में अकेले हैं और उन्हें एक बुद्धिमान साथी की आवश्यकता है। हम चाहते हैं कि तुम स्वर्ग जाकर उनका मनोरंजन करो।”
बीरबल तुरंत भांप गए कि यह उनके खिलाफ रचा गया कोई बहुत बड़ा षड्यंत्र है। उन्होंने दरबारियों के चेहरों पर दबी हुई मुस्कान देखी और समझ गए कि इसमें नाई और अन्य मंत्रियों का हाथ है।
बीरबल ने शांत रहकर उत्तर दिया, “जहाँपनाह, यह तो मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य की बात होगी कि मुझे आपके पूज्य पिताजी की सेवा करने का अवसर मिले। लेकिन मुझे स्वर्ग जाने की तैयारी करने और अपने परिवार के भरण-पोषण का प्रबंध करने के लिए कम से कम एक महीने का समय चाहिए।”
अकबर ने बीरबल की इस मांग को सहर्ष स्वीकार कर लिया।
बीरबल की गुप्त योजना Akbar Birbal Ki Kahani
घर पहुँचकर बीरबल ने तुरंत अपनी जान बचाने की योजना पर काम शुरू कर दिया। उन्होंने उस स्थान का पता लगाया जहाँ उन्हें जीवित जलाने की तैयारी की जा रही थी। बीरबल ने अपने कुछ विश्वासपात्र मजदूरों को बुलाया और उस स्थान से लेकर अपने घर के भीतर तक एक गुप्त सुरंग खुदवाई। सुरंग का एक सिरा ठीक उसी जगह खुलता था जहाँ चिता बनाई जानी थी। इस सुरंग को ऊपर से सूखी घास और लकड़ियों से इस तरह ढक दिया गया कि कोई भी इस पर संदेह न कर सके।
स्वर्ग यात्रा का दिन Akbar Birbal Stories
एक महीने का समय बीतने के बाद, वह दिन आ गया जब बीरबल को “स्वर्ग यात्रा” पर भेजा जाना था। पूरे नगर के लोग और सभी दरबारी इस अनोखी घटना को देखने के लिए एकत्रित हुए। बीरबल को सुंदर वस्त्र पहनाए गए और उन्हें फूलों से सजी चिता पर बैठाया गया।
जैसे ही चिता में आग लगाई गई, चारों तरफ धुआं ही धुआं फैल गया। उसी धुएं का फायदा उठाकर बीरबल चुपचाप चिता के नीचे बने गुप्त रास्ते (सुरंग) से होते हुए अपने घर सुरक्षित पहुँच गए। चिता धू-धू कर जल उठी और सभी विरोधियों ने राहत की सांस ली कि अब बीरबल हमेशा के लिए उनके रास्ते से हट गया है।
दरबार में बीरबल की वापसी Akbar Birbal Ki Kahani
बीरबल अगले कुछ महीनों तक अपने घर में ही छिपे रहे। इस दौरान उन्होंने अपने बाल और दाढ़ी को काफी लंबा होने दिया और उन्हें बिल्कुल अस्त-व्यस्त कर लिया। जब लगभग तीन-चार महीने बीत गए, तो एक दिन बीरबल अचानक अकबर के दरबार में हाजिर हुए।
बीरबल को जीवित और इस हालत में देखकर दरबार में सन्नाटा छा गया। अकबर अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर पा रहे थे। वे अपनी गद्दी से उठे और बीरबल को गले लगा लिया।
अकबर ने पूछा, “बीरबल! तुम वापस आ गए? हमारे पिताजी कैसे हैं? और तुम्हारी यह हालत कैसे हुई?”
बीरबल ने हाथ जोड़कर कहा, “जहाँपनाह! स्वर्ग बहुत ही सुंदर स्थान है। आपके पिताजी वहां अत्यंत ठाठ-बाठ और प्रसन्नता से रह रहे हैं। उन्होंने आपकी इस भेंट के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद दिया है।”
अकबर ने उत्सुकता से पूछा, “फिर तुम्हारी यह हालत क्यों है? तुम्हारे बाल और दाढ़ी इतने लंबे और बिखरे हुए क्यों हैं?”
बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा, “जहाँपनाह, स्वर्ग में सभी प्रकार की सुख-सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन वहां केवल एक ही कमी है। वहां कोई नाई (हज्जाम) नहीं है। इस वजह से आपके पिताजी और स्वर्ग के अन्य देवताओं के बाल और दाढ़ी बहुत बढ़ गए हैं। आपके पिताजी ने विशेष रूप से मुझे वापस भेजा है ताकि मैं आपसे उनके लिए एक अच्छे नाई को स्वर्ग भेजने का अनुरोध कर सकूं।”
सच का खुलासा और न्याय Akbar Birbal Ki Kahani
यह सुनते ही अकबर ने तुरंत दरबार में उपस्थित उसी नाई को बुलाया जिसने बीरबल को स्वर्ग भेजने की योजना सुझाई थी। अकबर ने कहा, “हमारे पिता को स्वर्ग में एक नाई की तुरंत आवश्यकता है। इसलिए हम तुम्हें भी उसी विधि से स्वर्ग भेजेंगे ताकि तुम वहां जाकर हमारे पूज्य पिता की सेवा कर सको।”
नाई बुरी तरह डर गया। वह अकबर के पैरों में गिर पड़ा और रोते हुए अपना सारा अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि कैसे उसने और कुछ अन्य ईर्ष्यालु मंत्रियों ने मिलकर बीरबल को जान से मारने के लिए यह षड्यंत्र रचा था।
अकबर को नाई और उन मंत्रियों पर बहुत क्रोध आया। उन्होंने तुरंत नाई और उसके साथ शामिल सभी दरबारियों को कारागार में डालने और कड़ी सजा देने का आदेश दिया। एक बार फिर, बीरबल ने अपनी बेजोड़ बुद्धिमत्ता और सूझबूझ से न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि अपने शत्रुओं को भी उनके किए की सजा दिलवाई।
कहानी की सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि ईर्ष्या और द्वेष की भावना अंततः मनुष्य का अपना ही विनाश करती है। दूसरों के लिए खोदा गया गड्ढा अक्सर खुद के गिरने का कारण बनता है। साथ ही, कठिन से कठिन परिस्थिति में भी यदि हम अपनी बुद्धि और धैर्य का उपयोग करें, तो किसी भी संकट से बाहर निकल सकते हैं।
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